15 साल, 300 मैच और हर मैच में शानदार ‘पारी’। धर्मशाला का क्रिकेट मैदान हो या फिर चेन्नई का चेपक स्टेडियम। हर जगह उपस्थिति रहती है इस ‘खिलाड़ी‘ की। एक और बेहतरीन ‘पारी’ की उम्मीद में ये आ पहुंचे हैं देहरादून।
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हम बात कर रहे हैं आगरा से आए बलवीर की, जो मैदान के बाहर के खिलाड़ी हैं। बलवीर एक फेस आर्टिस्ट हैं, जो क्रिकेट खेलने वाले हर देश के झंडा मिनटों में चेहरों पर उकेर देते हैं। इसके अलावा बलवीर झंडे और अन्य सामग्री भी दर्शकों को बेचते हैं। बड़े क्रिकेट मैचों में बलवीर सात से आठ हजार रुपये की कमाई आसानी से कर लेते हैं। अब उन्हें देहरादून से भी ऐसी ही उम्मीद है।
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रविवार को दोपहर के दो बजे थे। चिलचिलाती धूप में सभी पसीना पोंछ रहे थे, लेकिन बलवीर उत्साह के साथ स्टेडियम के बाहर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते दर्शकों की ओर नजरें गड़ाए देख रहे थे। एक हाथ में पेंट और ब्रुश थे तो दूसरे हाथ में झंडे एवं रिस्ट बैंड। वहां और लोग भी झंडे-टोपी आदि सामग्री बेच रहे थे, लेकिन बलवीर के अंदाज को देखते हुए हर कोई उन्हीं से सामान खरीद रहा था। बलवीर बताते हैं कि उनका खानदानी काम सेविंग ब्रुश बनाने का है। 15 साल पहले दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में हुए ऑस्ट्रेलिया और भारत के मैच ने उनकी किस्मत बदल दी।
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बलवीर बताते हैं कि वह अपने एक दोस्त के साथ स्टेडियम के बाहर पहुंचे थे। वह भी फेस आर्टिस्ट था। उसे उस दिन लगभग चार हजार रुपये की आमदनी हुई। इसके बाद बलवीर ने भी इसी को अपनी कमाई का जरिया बनाने की ठान ली। फिर क्या था। क्या दिल्ली और क्या मुंबई... जहां भी मैच होते वह अपनी कला का हुनर दिखाने पहुंचने लगे। बलवीर ने बताया कि उन्हें शुक्रवार को देहरादून में होने वाले मैच के बारे में पता चला था। इसके तत्काल बाद ही उन्होंने आगरा से पैसेंजर ट्रेन पकड़ी और शनिवार देर रात हरिद्वार आ पहुंचे। वहां से रविवार सुबह देहरादून पहुंच गए थे।
उन्होंने बताया कि अब तक वे 300 से ज्यादा क्रिकेट मैचों के दौरान सामग्री की बिक्री करने के साथ ही दर्शकों के चेहरों पर झंडे एवं नक्शे बना चुके हैं। हर मैच में उन्हें छह से आठ हजार रुपये की कमाई होती है। एक और दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने आजतक कोई क्रिकेट मैच नहीं देखा। बलवीर ने बताया कि उनके दो भाई और यहां आए हैं।