वन निगम को लॉट मिलने के बाद शुरू हुआ कटान
चीफ गढ़वाल के स्तर से कराई गई जांच में यह बात भी सामने आई है कि वन निगम को लॉट मिलने से पहले वहां अवैध कटान नहीं था। वन निगम ने कटान के बाद दो साल तक वहां से माल नहीं उठाया। जबकि, हाल के कुछ महीनों में पुराना माल उठान के नाम पर अवैध रूप से काटे गए पेड़ भी वहां से पास किए जा रहे थे।
डीएफओ और रेंजरों पर कब होगी कार्रवाई
चीफ गढ़वाल नरेश कुमार की जांच रिपोर्ट के बाद प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसमें डीएफओ और एसडीओ स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
जबकि, तीनों रेंजों (सांद्रा, देवता और कोटिगाड़) के वन क्षेत्राधिकारियों पर कार्रवाई के लिए मुख्य वन संरक्षक, मानव संसाधन विकास और कार्मिक प्रबंधन को लिखा गया है। पत्र जारी होने के बाद वन विकास निगम तो एक्शन में आ गया है, लेकिन डीएफओ और रेंजरों पर कार्रवाई का इंतजार है।
कनासर मामले में किसको बचा रही सरकार
टोंस वन प्रभाग में हरे पेड़ काटे जाने के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन चकराता में काटे गए देवदार के पेड़ों के मामले में वन विभाग के स्तर से अभी तक जांच समिति तक नहीं बनाई गई है। जबकि, यहां टौंस से कहीं अधिक पेड़ काटे गए हैं। इनकी संख्या एक हजार के आसपास बताई जा रही है।
इस मामले को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली के साथ ही सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर सरकार किसको बचा रही है। चकराता वन प्रभाग के कनासर रेंज में काटे गए देवदार और कैल के सैकड़ों पेड़ों के मामले में बात जांच से आगे नहीं बढ़ पा रही है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस मामले में सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि यह सब कुछ सरकार के संरक्षण में हुआ है। यदि ऐसा नहीं है तो सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे। उधर, प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक का कहना है कि मामले में कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है, शीघ्र ही इसके नतीजे सामने आएंगी। वन विभाग इस मामले में भी बड़ी कार्रवाई करेगा, लेकिन चीजों को सही तरीके से करने में थोड़ा वक्त लग रहा है।