स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों के फर्जी तेल बिल घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फाइल पर अनुमोदन दे दिया है। वर्ष 2009 से 2012 के बीच हुए इस घोटाले की विभागीय जांच में कई अधिकारियों को दोषी पाया गया था। इनमें डॉ. आरके पंत स्वास्थ्य महानिदेशक और डॉ. दीपा शर्मा सीएमओ पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। जबकि डॉ. गुरपाल सिंह और डॉ. राजीव हटवाल का निधन हो चुका है।
मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय की संलिप्तता भी सामने आई थी। लिहाजा उच्च स्तर पर विभागीय अधिकारियों को बचाने और मामले को दबाने के हर संभव प्रयास भी हुए। यहां तक कि मामले को भटकाने के लिए ट्रैवल एजेंसी वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि असली दोषी अधिकारी ठाठ से नौकरी करते रहे।