आयुष सचिव कार्यालय में तैनात दो कर्मचारियों पर एक गुमनाम खत भारी पड़ गया। बिना अफसरों की जानकारी में लाए आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों की भर्ती मामले में आएगुमनाम शिकायती पत्र को डाक रजिस्टर में चढ़ाने पर एक नियमित कर्मचारी को प्रतिकूल प्रविष्टी दी गई है। इसी मामले पीआरडी के कर्मचारी को मूल विभाग भेज दिया गया है।
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों की बीते दिनों हुई परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लग रहा है। इस मामले में एक गुमनाम खत आयुष सचिव कार्यालय में पहुंचा। दो पन्ने के खत में कथित तौर पर कैसे गड़बड़ी हुई है, इसका जिक्र है। लेकिन, खत में किसी भी व्यक्ति के हस्ताक्षर, पता, संपर्क के लिए कोई संपर्क नंबर तक नहीं था।
विभागीय नियमों के अनुसार कार्यालय में आने वाले पत्र को क्लर्क पढ़ने के बाद उस पर मार्किंग करता है, जिसके बाद सचिव के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता है। फिर सचिव के अवलोकन के बाद डाक रजिस्टर में चढ़ाने और उसका डिस्पैच नंबर डालने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
लेकिन, कंप्यूटर आपरेटर पद पर तैनात कर्मचारी ने यह खत बिना किसी के जानकारी में लाए ही डाक रजिस्टर में चढ़ा दिया। बाद में सचिव आयुष हरबंश चुघ को जानकारी हुई, तो मामले में कर्मचारियों से पूछताछ की गई। कंप्यूटर आपरेटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी खत देने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
केवल इतना बताया कि उनको मेज पर खत रखा मिला था। सचिव आयुष के अनुसार मामला संदिग्ध होने के कारण कंप्यूटर आपरेटर राकेश कुमार को प्रतिकूल प्रविष्ट देते हुए दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया है। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बबिता को पीआरडी के मूल विभाग में भेज दिया गया है।