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सीएम त्रिवेंद्र ने गिनाई छह महीने की उपलब्धियां, जानिए कहां पहुंचा उत्तराखंड

Tue, 19 Sep 2017 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सरकार के छह माह का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार की उपलब्धियां गिनाई हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस दौरान आम जनता, गरीब, पिछड़े और दलित समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार ने अपने इस छह माह के अल्पकार्यकाल में कुछ ठोस निर्णय लिए हैं।
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उन्होंने समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाएं पहुंचाने की मंशा जताई। यह भी दावा किया कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र व्यक्ति को मिले, इसके लिए उन्होंने कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ही पहल शुरू कर दी थी।

मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे खुद जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं, इसके लिए भी आधुनिक तकनीक का भी पूरा उपयोग कर रहे है।
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ऐसी व्यवस्था की गई है कि फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकता है। अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आम जनता से सीधा संवाद कायम किया जाए और जन समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जाए।

टोल फ्री नम्बर (1905) की व्यवस्था

समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर (1905) की व्यवस्था की गई है तथा आई.वी.आर.एस. के माध्यम से स्थानीय बोलियों में भी शिकायतें दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

सेवा के अधिकार अधिनियम को और अधिक सशक्त बनाने के साथ ही अन्य आवश्यक सेवाओं को शामिल कर 150 सेवाओं की सूची तैयार की गई है। ब्लॉक स्तर तक बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी गई है। विभिन्न अनियमित्ताओं की त्वरित जांच के लिए एस.आई.टी. का गठन किया गया है।

सीएम डैशबोर्ड जैसी अभिनव पहल शुरू की गई है। इसके माध्यम से विभागों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी, जिस पर सीधा नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय का होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले राज्यहित में कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें 2019 तक हर घर को बिजली एवं शत-प्रतिशत साक्षरता, 2022 तक सबको घर, किसानों की आय दोगुनी करने तथा 5 लाख बेरोजगार युवाओं के लिए कौशल विकास का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अधिकारियों को निर्देश ही जारी नहीं किए गए हैं, बल्कि इसके लिए ठोस कार्ययोजना भी तैयार करने को कहा गया है।

महत्वपूर्ण निर्णय और उपलब्धियां-:

- पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत शेष 63 ग्रामों का विद्युतीकरण दिसम्बर-2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समस्त परिवारों को 2019 तक विद्युत कनेक्शन देने का लक्ष्य है। बिजली चोरी रोकने के लिये ओवरहेड एल.टी. लाइनों को एल.टी.ए.वी. केबल प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है। पांच मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित किया गया है। उजाला एल.ई.डी. योजना के तहत 39 लाख एल.ई.डी. बल्ब वितरित कर दिए गए हैं। मार्च 2018 तक 100 लाख एल.ई.डी. बल्ब वितरण का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी दफ्तरों में एल.ई.डी. का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

- उत्तराखण्ड का ग्रामीण क्षेत्र खुले में शौच मुक्त होने वाला देश का चैथा राज्य बना है। राज्य में स्वच्छता अभियान को भारत सरकार का बैस्ट प्रैक्टिसेज दर्जा मिला है। शहरी स्वच्छता कार्यक्त्रस्म के लिए मार्च-2018 तक सभी 92 शहरी निकायों को ओ.डी.एफ. बनाने का लक्ष्य पूरा करने का दायित्व जिलाधिकारियों को दिया गया है।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और अन्य राजस्व कार्यों हेतु 1000 पटवारी भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। पर्वतीय चकबंदी कार्य के लिए अधिनियम और नियमावली के लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है।
 
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महत्वपूर्ण निर्णय और उपलब्धियां-:

- उत्तराखण्ड में 100 जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। राज्य के 6 अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुविधा का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में सेना के 70 सेवानिवृत्त डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना के माध्यम से संचालित करने के लिए कार्रवाही चल रही है। राज्य में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को देखते हुए टेलीमेडिसिन और टेली रडियोलॉजी की व्यवस्था का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए 13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टिनेशन्स के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल का विकास किया जाएगा।

- खरसाली-यमुनोत्री रोप-वे, गोविन्दघाट-घाघरिया रोप-वे व गुच्चुपानी-मसूरी रोप-वे का निर्माण किया जाएगा। प्रदेश में हॉस्पिटलिटी यूनिवर्सिटी की स्थापना का निर्णय लिया गया है। कुमांऊ एवं गढ़वाल मण्डल विकास निगमों का विलय किया जाएगा। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे व ‘एपिक सर्किट’ विकसित करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2018 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए तेजी से कार्य कराए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को प्रतिदिन डाइट के लिए 250 रुपए देने का निर्णय लिया गया है।
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