उन्हें शनिवार को वासुकीताल जाना था।, लेकिन दिनभर रिमझिम बारिश और घने कोहरे के चलते वह नहीं जा सके। दोपहर बाद आचार्य ध्यान गुफा में पहुंचे और शाम तक वहां ध्यान किया। इसके बाद वह भगवान केदारनाथ की सायंकालीन आरती में शामिल हुए।
2 से 4 अक्टूबर तक वह ध्यान गुफा में ही प्रवास करते हुए योग-साधना करेंगे। साथ ही उत्तराखंड और देश की सुख-समृद्धि के लिए यज्ञ-हवन करेंगे। श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि ध्यान गुफा के बाहर आंगन में यज्ञ-हवन की तैयारियां जारों पर की जा रही हैं।