महिला से दुष्कर्म के आरोपी को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्य और गवाह घटना को कोर्ट में साबित नहीं कर पाए। पाया गया कि महिला और आरोपी के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। ऐसे में साक्ष्यों के अभाव में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। आरोपी तीन साल से जेल में बंद था।
अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि मुकदमा एक महिला के पति की ओर से सहसपुर थाने में दर्ज कराया गया था। महिला के अनुसार वह छह नवंबर 2020 को अपने काम से लौट रही थी। तभी रात 10 बजे सहसपुर में दो मुहे पुल के पास चार युवक मिले। इनमें से सुशील उर्फ भल्ला निवासी लखनवाला ने उसे रोक लिया और जबरदस्ती अपने साथ ले गया। यह देखकर तीन युवक वहां से भाग गए। आरोप है कि इसके बाद भल्ला ने महिला को शराब पिलाई और नदी में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला का कहना है कि वह करीब 100 मीटर तक बिना कपड़ों के चली। इसके बाद घर पहुंची।
अभियोजन की ओर से इस मामले में पांच गवाह पेश किए गए। इनमें मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें महिला के शरीर पर चोट दर्शायी गई थीं। इस पर बचाव पक्ष की ओर से महिला और भल्ला के आपसी संबंधों को साबित किया गया। पता चला कि महिला उसके साथ लंबे समय से फोन पर बात करती थी। घटना से कुछ देर पहले भी बात हुई थी। आरोपी भल्ला को सात नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, महिला के शरीर पर उस वक्त चोट के निशान नहीं थे। बचाव पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि महिला के पति को भल्ला के साथ उसके संबंधों का पता चल गया था। जिस पर पति ने महिला की पिटाई की थी, इन्हीं चोटों को मेडिकल में दर्शाया गया था और भल्ला पर मारपीट का झूठा आरोप लगाया गया था। पति ने ही पत्नी पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए दबाव डाला था।