एक शताब्दी बीत गई पर पहाड़ पर रेलगाड़ी नहीं चढ़ी। कभी दृढ़ इच्छा शक्ति की कमी तो कभी केंद्रीय वन मंत्रालय की हीलाहवाली। पर अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के प्रथम फेज को केंद्रीय मंत्रालय ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है।
इस परियोजना के तहत तीन सौ हेक्टेयर वन भूमि परियोजना को हस्तांतरित की जानी है। इस कदम से ट्रेन के पहाड़ पर चढ़ने की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। माना तो यह जा रहा है कि दिसंबर में परियोजना पर कार्य शुरू हो जाएगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को दो फेज में बांटा गया है। मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के केंद्रीय अपर प्रमुख वन संरक्षक अजय कुमार ने बताया कि पहले फेज के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इसके बाद विधिवत स्वीकृति दी जाएगी। दूसरे फेज के लिए प्रक्रिया चल रही है।
यह परियोजना पूरी होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा अधिक सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही यात्रा का समय भी ढाई से तीन घंटे कम हो जाएगा।
सवा सौ किमी लंबी यह रेल परियोजना पांच जिलों देहरादून, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग से होकर गुजरेगी। इस पर 12 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहला रेलवे स्टेशन दून के वन चौकी क्षेत्र में प्रस्तावित है और आखिरी स्टेशन कर्णप्रयाग होगा।