मौत के बाद देशभर में चर्चा का विषय बनी आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात दो से तीन बजे के आसपास की गई थी।
पुरोहित की बही में मिला था क्लू
हरिद्वार में तलवार परिवार की ओर से अपने पुरोहित की बही में आरुषि की मौत का यही समय दर्ज करवाया गया है। मर्डर मिस्ट्री के खुलासे में सीबीआई को पुरोहित की बही से ही तलवार दंपति के खिलाफ क्लू मिला था।
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नुपूर और राजेश तलवार 17 मई 2008 को आरुषि की अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचे थे। दंपति ने तीर्थ पुरोहित अवनीश शर्मा की बही में आरुषि की मौत का समय रात दो-तीन बजे दर्ज कराया है। इस पर सीबीआई के शक की सुई तलवार दंपति के इर्द-गिर्द घूमने लगी थी।
सीबीआई को संदेह इसलिए हुआ कि दंपति के बयान के मुताबिक उन्हें आरुषि की हत्या का पता नहीं चला था। उन्हें तो बाद में लाश दिखी। फिर उन्हें आरुषि की हत्या का समय कैसे पता चल गया।
मीडिया ने भी खड़े किए थे सवाल
जून 2008 में सीबीआई की टीम तलवार दंपति को लेकर यहां पीपल वाली हवेली स्थित श्री रामचंद्र की गद्दी पर पहुंची थी।
मर्डर मिस्ट्री के खुलासे की नींव यहां से ही रखी गई थी। सीबीआई के इस प्वाइंट के लीक होने पर मीडिया ने इस प्वाइंट पर लंबे चौड़े सवाल खडे़ किए थे।
यह कहना गलत नहीं होगा कि, तलवार दंपति ने अपने खिलाफ सुराग यहां खुद ही छोड़ दिया था जो मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझाने की महत्वपूर्ण कड़ी रहा।
तलवार दंपति को खाए जा रही थी कोई बात
अमूमन जब किसी के घर में हत्या या मौत होती है तो परिजन कर्मकांड संपन्न कराने के दौरान आत्मा की शांति के लिए पुरोहितों से तरह-तरह के उपाय पूछते हैं। लेकिन जब तलवार दंपति आरुषि की अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचे तो वह गुमसुम थे।
उन्होंने कोई उपाय नहीं पूछा। कर्मकांड करवाकर चलते बने। तलवार परिवार के कुल पुरोहित अवनीश शर्मा उर्फ रिंकू ने बताया कि अस्थि विसर्जन के दौरान डॉ. राजेश तलवार व उनकी पत्नी नुपूर साथ में आए भाई दिनेश तलवार, चचेरे भाई सतीश तलवार, परिचित भूषण व लखनपाल से ही हल्की-फुल्की बात करते रहे।
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इस दौरान दंपति के मोबाइल भी खूब बजते रहे। कनखल के सतीघाट पर आरुषि की अस्थियां विसर्जित की गई। उसके बाद कुशाघाट पर पिंडदान का कर्मकांड संपन्न कराया।
तब भी दंपति की आंखों में आंसू नहीं आए। कर्मकांड संपन्न होने के बाद तलवार दंपति और उनके साथ आए परिजन गाजियाबाद का रुख कर गए।
10-12 साल बाद भरी थी नुपूर की गोद
पुरोहित अवनीश शर्मा ने बताया कि तलवार दंपति को 10-12 साल बाद संतान की प्राप्ति हुई थी। उनके पिता जनक तलवार दिल्ली के एक उच्च अस्पताल में वरिष्ठ अधिकारी थे। वे हरिद्वार आते रहते थे।
अमृतसर के हैं राजेश
तलवार दंपति की असली जाति तालवाड़ है। देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री के गुनाहगार साबित हुए डॉक्टर राजेश तलवार मूल रुप से अमृतसर (पंजाब) शहर के दुल्लो का कटड़ा, चाय वाली गली के रहने वाले हैं।
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