धर्मशाला के नाम पर सर्विस टैक्स भरने से बचना अब संभव नहीं होगा।
यह हैं सर्विस टैक्स का दायरा
अब धर्मशाला, गेस्ट हाउस, होटल सभी को एक दायरे में ले लिया गया है। सीमा तय कर दी गई है कि अगर ग्राहक एक हजार रुपए से अधिक का कमरा लेकर कहीं रहता है तो सर्विस टैक्स भरना ही होगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को जिन बजट प्रावधानों की घोषणा की, उनमें विभिन्न सेवाओं पर सर्विस टैक्स से जुड़े कई ऐसे बिंदुओं को भी क्लियर किया गया है, जिन पर अभी तक संशय बना हुआ था कि वह टैक्स के दायरे में हैं या नहीं।
मसलन नगर निगम की वाटर सप्लाई, पब्लिक हेल्थ एंड सेनिटेशन, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सेवाएं इस दायरे से बाहर हैं, लेकिन इनके लिए कंसल्टेंसी हायर की जाती है तो निश्चित रूप से सर्विस टैक्स चुकाना होगा। इसकी दर 12.36 ही रहेगी।
इसी तरह बैंक, वित्तीय संस्थानों के लिए हासिल की जाने वाली रिकवरी एजेंट की सेवाएं भी सर्विस टैक्स के दायरे में होंगी।
अलबत्ता, स्कूली बच्चों, टीचरों के लिए केटरिंग, ट्रांसपोर्टेशन, स्कूल में सिक्योरिटी सर्विस इस टैक्स के दायरे से बाहर की गई हैं।
एसी टैक्सी पर भी भरेंगे टैक्स
अभी तक सभी टूर आपरेटर्स को सर्विस टैक्स 4.94 की दर से चुकाना पड़ रहा था, लेकिन इसका भुगतान टूर आपरेटर की सेवा लेने वाले की जेब से हो रहा था।
नए प्रावधान के मुताबिक अब इंडिविजुअल टैक्सी हायर करने यानी प्वाइंट-टू-प्वाइंट टैक्सी पर भी सर्विस टैक्स चुकाना होगा। लेकिन इसमें एसी टैक्सी की शर्त रखी गई है।
यहां भी होगा टैक्स
- सिनेमा हाल में दिखाए जाने वाले विज्ञापन पर
- वेबसाइट, इंटरनेट पर प्रदर्शित विज्ञापन पर
- मोबाइल फोन के जरिए प्रदर्शित विज्ञापनों पर
- कॉलोनी के गेट पर लगने वाले बोर्ड विज्ञापनों पर
बजट के प्रावधानों में विभिन्न सेवाओं पर सर्विस टैक्स से जुड़े कई ऐसे बिंदुओं को साफ किया गया है, जिनमें पहले बहुत क्लैरिटी नहीं थी।
- तापस चक्रवर्ती, कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स
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