इधर वह हाजिरी लगाएंगे, उधर पूरा रिकॉर्ड आयुष मंत्रालय तक पहुंच जाएगा। प्रदेश में आयुर्वेद विश्वविद्यालय को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह तुरंत इस पर काम करे और होम्योपैथिक कॉलेजों में भी हाजिरी शुरू कराए।
यहां आधार का इस्तेमाल होने से फर्जी तौर पर एक ही फैकल्टी कई-कई कॉलेजों में काम नहीं कर पाएगी। अभी तक तमाम कॉलेज एक ही फैकल्टी के कागज जमा कराकर फर्जीवाड़ा करते थे।
सरकार का आधार बेस्ड जियो लोकेशन अटेंडेंस नियम अच्छी पहल है। इससे फैकल्टी असली रहेगी और फर्जीवाड़े भी नहीं होंगे। सभी कॉलेजों को हर हाल में 15 मार्च से पहले यह व्यवस्था लागू करनी होगी।
- डॉ.आरके मिश्रा, डीन, आयुर्वेद विश्वविद्यालय