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Dehradun News: प्रेमनगर में आया ठगों का गैंग, फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखा सामान लेकर चंपत

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I जिस विक्रम से आए चारों ठग उसे भी दिखाया 40 रुपये भुगतान का स्क्रीनशॉट I
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I किसी भी दुकानदार के पास नहीं पहुंचा भुगतान, पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटीI
I प्रेमनगर बाजार में शनिवार को चार ठग दुकानदारों से हजारों रुपये का सामान लेकर उन्हें फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखाकर चंपत हो गए। एक के बाद एक कई दुकानों पर वे गए और सामान पसंद कर खरीदा। जब किसी दुकानदार को भुगतान नहीं मिला तो उनकी तलाश की। मगर आरोपियों कहीं पता नहीं चला।I
Iकुछ देर में विक्रम स्टैंड पर एक चालक उनके बारे में बात करता दिखा। पता चला कि ये चारों ठग उसके विक्रम में बैठकर ही प्रेमनगर आए थे। उसे भी उन्होंने 40 रुपये फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखाया था। चारों ठग सबसे पहले प्रेमनगर बाजार में ग्रोवर जनरल स्टोर पर पहुंचे थे। यहां से उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत का 1700 रुपये का सामान खरीदा। ठगों में से एक ने उनकी दुकान का क्यूआर कोड स्कैन किया और 1700 रुपये के भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखा दिया। दुकान पर भीड़ लगी थी तो दुकानदार मोहित ग्रोवर ने भी स्क्रीनशॉट देखकर ही जाने दिया। इसके बाद राशि कलेक्शन से उन्होंने इसी तरह से पांच हजार रुपये का सामान खरीदा।I
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Iयहां से उन्होंने पावर बैंक, चार्जर आदि सामान लेकर अपने बैग में रख लिया और भुगतान का स्क्रीनशॉट दिखाकर चलते बने। अब बारी अभिषेक सेल प्वाइंट की थी। यहां से ठगों ने 1200 रुपये की मोबाइल एक्सेसरीज खरीदी। यहां भी इसी तरह स्क्रीनशॉट दिखाते हुए चलते बने। पीड़ित दुकानदारों की शिकायत पर पुलिस सभी दुकानों पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। आसपास के लोगों ने भी उन्हें वहां से तेजी से जाते देखा। उनका मकसद ज्यादा से ज्यादा दुकानदारों को निशाना बनाना था।
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Iएसओ प्रेमनगर कुंदन राम ने बताया कि सभी के हुलिए सीसीटीवी फुटेज में मिल गए हैं। आरोपी बल्लूपुर चौक से प्रेमनगर तक एक विक्रम में आए थे। उस विक्रम चालक को भी इसी तरह से स्क्रीनशॉट दिखाया था। बल्लूपुर से प्रेमनगर और फिर वापसी के रूट के सीसीटीवी भी चेक किए जा रहे हैं। इस मामले में मोहित ग्रोवर की ओर से थाने में शिकायत दी गई है।I
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Iकई एपीके फाइल करते हैं धोखाधड़ी I
Iइस तरह के मामले अब से चार साल पहले देहरादून और आसपास के इलाकों में खूब आए थे। पुलिस को जब इनकी शिकायत हुई तो जांच की गई। साइबर एक्सपर्ट विनेश गुप्ता ने बताया कि एंड्रोयड पैकेज किट (एपीके) फाइल डाउनलोड कर एक एप्लीकेशन फोन में अपलोड हो जाता है। यह एप्लीकेशन बिल्कुल यूपीआई की तरह ही दिखता है। इससे स्कैन भी इसी तरह से किया जाता है, जैसे विभिन्न यूपीआई एप से। इसके बाद भुगतान का मैसेज आता है, जिसे ठग दुकानदारों को दिखा देते हैं। इस मामले में उन्होंने किस तरह से ठगी को अंजाम दिया है यह पुलिस जांच में पता चलेगा। ज्यादातर संभावनाएं इसी तरह की एपीके फाइल की ही लग रही हैं।I
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