भारी भीड़ के चलते यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। पैदल मार्ग पर भी प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 14 मेडिकल रिलीफ पोस्ट (एमआरपी) स्थापित की गई हैं। साथ ही धाम में चल रहे अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं।
केदारनाथ में एक डॉक्टर एक दिन में चार सौ से अधिक यात्रियों के जांच कर रहा है। भारी भीड़ के चलते यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। पैदल मार्ग पर भी प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों की जांच की जा रही है।
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स्वास्थ्य विभाग ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 14 मेडिकल रिलीफ पोस्ट (एमआरपी) स्थापित की गई हैं। साथ ही धाम में चल रहे अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य विभाग के अलावा विवेकानंद ट्रस्ट और सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विस भी यात्रियों को चिकित्सा सेवा मुहैया करा रहे हैं। यहां आठ चिकित्सक तैनात किए गए हैं, जिनमें फिजीशियन व अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं।
धाम में प्रतिदिन बढ़ रही यात्रियों के आंकड़े के सामने डॉक्टरों की संख्या कम साबित हो रही है। स्थिति यह है कि एक डॉक्टर को प्रतिदिन 400 से 500 मरीज देखने पड़ रहे हैं। इनमें पैरों में दर्द, सिरदर्द, चक्कर आना, बेहोशी के मामले सबसे अधिक हैं। साथ ही 10 से 15 मामले इमरजेंसी के हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है।
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धाम में मौजूद सिक्स सिग्मा के सीईओ डा. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि ओपीडी का दबाव बढ़ रहा है। इधर, गौरीकुंड-रुद्रप्रयाग पैदल मार्ग पर संचालित 12 ओपीडी में भी काफी संख्या में यात्री स्वास्थ्य की जांच करा रहे हैं।
सीएमओ डा. बीके शुक्ला ने बताया कि पिछले पांच दिनों से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक यात्री सोनप्रयाग से केदारनाथ पहुंच रहे हैं। हर एमआरपी में 250 से 350 ओपीडी हो रही हैं। दर्द और सांस लेने में दिक्कत के मामले अधिक आ रहे हैं। एक माह के लिए सभी एमआरपी में दवाएं, ऑक्सीजन सिलिंडर व अन्य जरूरी उपकरण भेजे गए हैं।