97 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आरएल अवस्थी रविवार रात घर में गिरकर चोटिल हो गए। पत्नी रजिया बेगम और नातिन सेवा में जुटी हैं। जब अमर उजाला संवाददाता उनके रेठा मंडी मुस्लिम कॉलोनी स्थित घर पहुंचा तो बोले इतना लंबा नहीं जीना चाहिए। अब जीने की इच्छा नहीं है।
पत्नी रजिया बेगम तल्ख अंदाज में कहती हैं कि बूढ़े हो गए हैं हम, कोई पूछता नहीं है। न समाज न सरकार। हालांकि आजाद हिंद सेना के समर्पित सिपाही रहे अवस्थी को दो-दो पेंशन मिलती हैं। कुल उन्नीस हजार की रकम घर पहुंचती है।
कोई सुध लेने नहीं आता
सरकारी चिकित्सालयों में विशेषकर दून चिकित्सालय में अतिविशिष्ट सेवाएं प्राप्त होती हैं। दवाएं भी नि:शुल्क मिलती हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग का रवैया सकारात्मक रहता है। लेकिन फिर आह भरते हुए तमिल मूल की मुसलमान रजिया बेगम कहती हैं शासन-प्रशासन को कोई फिक्र नहीं है हमारी। वो तो पेंशन है नहीं तो कभी के अल्लाह को प्यारे हो जाते।
उदासीनता ने तोड़ दिया
न कभी कोई अफसर आता है और न ही छोटा बड़ा नेता। समाज भी बेहद उदासीन है। इस बुढ़ापे के शरीर में मैं भी कम ही सेवा कर पाती हूं इनकी। खुद भी बीमार हूं। समाज व हुकूमत की उदासीनता से अवस्थी जी टूट गए हैं। एकाकीपन ने मुझे भी घेर लिया है।
फिर खामोशी तोड़ती हुई तमिल अंदाज की उर्दू में बोलती हैं मुलुक की आजादी के लिए कुर्बानी दी थी तो किसी फायदे के लिए नहीं। इसलिए जो है वह बेहतर है बाकी अल्लाह जाने। लेकिन जिंदगी का मजा नहीं रहा।