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जानलेवा हमले में सात साल का कारावास

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जानलेवा हमले में सात साल का कारावास
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। अदालत ने बगीचे की रखवाली करने के विवाद में 38 साल पहले कोठी में घुसकर माली को गोली मारने के आरोपी को सात साल के कारावास और तीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जमानत मिलते ही आरोपी फरार हो गया। 36 साल तक वह नाम बदलकर हिमाचल प्रदेश में छिपा रहा।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि रायपुर थाना क्षेत्र स्थित वेदप्रकाश के बगीचे की रखवाली करने को लेकर माली छोटेलाल और सुरेश चंद के बीच विवाद था। सुरेश निवासी चंदोटी थाना राजपुर ने 21 सितंबर 1980 को कोठी में घुसकर छोटेलाल को गोली मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। जमानत के बाद कोर्ट में सुनवाई के दौरान 1982 मेें आरोपी सुरेश चंद गायब हो गया। कोर्ट से लगातार उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए जा रहे थे। इसी बीच 12 सितंबर 2018 को सुरेश हिमाचल से पकड़ में आया तो कोर्ट में सुनवाई शुरू हो सकी।
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अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शंकर राज की कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की तरफ से आठ गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी सुरेश चंद को घर में घुसकर जानलेवा हमला करने का दोषी माना। आईपीसी की धारा 307 में सुरेश को सात साल के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना राशि अदा न करने पर आरोपी को तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। आईपीसी की धारा 452 में भी सात साल के कारावास और दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना राशि न देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास होगा।
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