ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
देश में कई राज्य ऐसे हैं, जहां की लोक संस्कृति खासी लोकप्रिय है। इसके बावजूद वहां दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है। ऐसे में उन कलाकारों को मौका देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है। ये बातें पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की नार्थ जोन कल्चर सेंटर की ओर से आयोजित बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि बैठक सकारात्मक रही। इस दौरान संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए कई अहम बिंदुओं पर चर्चा के साथ ही विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों से सुझाव भी मांगे गए।
पर्यटन नगरी मसूरी में राज्यों की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस अहम बैठक में उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सहित सात राज्यों के संस्कृति से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने कहा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की बैठक हर वर्ष होती है। इसी कड़ी में इस वर्ष बैठक मसूरी में हुई। उन्होंने बताया की अगली बैठक सितंबर या नवंबर में होगी, जिसमें सात अन्य राज्यों की संस्कृति को आगे बढ़ाने पर मंथन किया जाएगा। मसूरी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यहां का मौसम हर किसी को आकर्षित कर लेता है।
वहीं, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड के परंपरागत वाद्य यंत्रों को बचाने और उन्हें देश-विदेश तक पहुंचाने पर विचार विमर्श किया गया। यहां की विभिन्न विधाएं, मांगलगीत गाने वाले कलाकारों के प्रोत्साहन आदि पर भी मंथन हुआ। सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य सरकार का 13 जिले, 13 डेस्टिनेशन की योजना पूरी होने वाली है। बैठक में पंजाब के सचिव जेएम बालामुरुगन, सह सचिव संस्कृति भारत सरकार पद्मालोचन साहू, हरियाणा से शिवकुमार, जम्मू-कश्मीर से संजीव गुप्ता, हिमाचल प्रदेश से राकेश कुमार कोलरा, उत्तराखंड की संस्कृति निदेशक बीना भट्ट, पंजाब से बलविंदर सिंह जग्गी, डॉ. पूर्णिमा चौहान हिमाचल, अरुण कुमार गुप्ता आदि मौजूद थे।