ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
शिक्षा निदेशालय और मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में 31 जुलाई को हुई तालाबंदी में शामिल शिक्षकों को सरकार ‘अभयदान’ दे सकती है। शिक्षकों के आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के रुख में कुछ नरमी आई है। चार जुलाई को वह देहरादून में संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात भी कर सकते हैं।
शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने तालाबंदी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, खुद निदेशालय में करीब तीन घंटे कार्यालय से बाहर रहने और शिक्षकों का विरोध सहने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि, उनके आदेश पर पिथौरागढ़ और बागेश्वर में तालाबंदी में शामिल शिक्षकों के खिलाफ तहरीर दी गई।
वहीं, शिक्षा मंत्री के आदेश पर तालाबंदी में शामिल शिक्षकों का चिह्नीकरण भी शुरू किया गया। इसमें ऐसे शिक्षकों के प्रकरणों की भी जांच की जा रही है, जो उस दिन किसी भी तरह की छुट्टी लेकर गए थे। बताया जा रहा है कि पहले मामले में सख्त नजर आ रहे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय हड़ताल खत्म होने के बाद कुछ नरम पड़े हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने इस मामले में अभी कोई कार्रवाई न करने को कहा है।
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संदेश देने में कामयाब रहे शिक्षा मंत्री
आंदोलन खत्म करने पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने भले ही शिक्षकों का आभार जताया हो, लेकिन अपने सख्त रुख से वह अपना संदेश देने में कामयाब रहे हैं। आंदोलन के दौरान उन्होंने नेतृत्व कर रहे शिक्षक नेताओं का तबादला कर दिया, जो उत्तराखंड के इतिहास में शायद पहली बार हुआ। वह यह संदेश देने में कामयाब रहे कि चाहे कुछ भी हो, वह शिक्षकों के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
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सरकार ने भी दिया सख्ती का संदेश
राजकीय शिक्षक संघ की हड़ताल को पूरी तरह नजरअंदाज कर सरकार ने भी सख्ती का संदेश दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत किसी भी मंत्री या अधिकारी ने शिक्षकों को सहयोग देने के संकेत नहीं दिए। इससे पहले आज तक की सभी सरकारें शिक्षकों के आगे नतमस्तक हो जाती थीं, लेकिन उत्तरा पंत के बाद लगातार दूसरे मामले में सरकार ने शिक्षकों के आगे न झुकने की रणनीति बनाई और कामयाब भी रही।