अमर उजाला ब्यूरों
हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने तहसील परिसर में बनी जिला पंचायत की 26 दुकानों के आंवटन में भी भारी अनियमितता पाई हैं। हैरानी की बात ये है कि इन दुकानों के आवंटन के लिए कोई भी न्यूनतम बोली तय नहीं की गई। ड्राफ्ट के बजाय लेकर नगद पैसे लेकर दुकानें आवंटित की गई और ली गई रकम को भी आवंटन के बाद घटा दिया गया था। डीएम ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच जारी है। वे शीघ्र ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेंगे।
कुछ जिला पंचायत सदस्यों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने शुक्रवार को जांच शुरू की थी। अब तक के तथ्यों में यह बात सामने आई कि पहले अधिक रकम वसूली गई थी जो बाद में कम कर दी गई। जिला पंचायत की इन दुकानों के आवंटन के समय पांच- पांच लाख कैश लिया गया। बाद में कम दाम पर दुकानें दे दी गई। चौंकाने वाली बात ये है कि एक- एक व्यक्ति को कई- कई दुकानें दे दी गई है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजीवनाथ त्रिपाठी का कहना है कि पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत ही दुकानों का आवंटन किया गया है। कहीं भी कोई अनियमितता नहीं की गई।
युवा नेता बेच रहा दुकानें
दुकानों का निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी ने बोर्ड देखकर जिस प्रापर्टी डीलर को फोन किया था वह फोन नंबर जिला पंचायत की राजनीति से जुड़े एक युवा नेता का बताया गया है। सूत्रों की मानें तो आवंटन के समय उसे भी कई दुकानें मिली है और वह अब औने पौने दाम में मिली दुकानों को महंगी रकम लेकर बेच रहा है। यही नहीं बकायदा शहर में दुकानों के बेचने के लिए पंपलेट भी बांटे गए है।