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Dehradun News: नंदा देवी कोर जोन में जैव विविधता अध्ययन के लिए 85 सदस्यीय दल रवाना

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-वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दिखाई हरी झंडी
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28 जून तक होगा दुर्लभ वन्यजीवों, ग्लेशियरों और वनस्पतियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण

अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून/ज्योतिर्मठ। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान में जैव विविधता एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों के अध्ययन के लिए रविवार को नंदा देवी बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग एक्सपीडिशन-2026 रवाना हो गया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मोनाल विश्राम गृह से अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभियान में 30 सदस्यीय कोर टीम सहित पोर्टरों समेत कुल 85 सदस्य शामिल हैं।
अभियान में वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, आईटीबीपी, एसडीआरएफ तथा अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। लाता गांव पहुंचने पर दल ने नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद अपने निर्धारित अभियान के लिए रवाना हो गए। यह अभियान 28 जून तक चलेगा। इस दौरान विशेषज्ञ क्षेत्र की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों, वनस्पतियों अध्ययन करेंगे। इसमें ग्लेशियरों का भी अध्ययन किया जाएगा। अगर कोई बदलाव होगा, तो उसको टीम रिपोर्ट करेगी।
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आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल
इस बार सर्वेक्षण कार्य को अधिक सटीक बनाने के लिए ड्रोन, जीआईएस तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। तकनीक के माध्यम से मिली जानकारी का टीम मौके पर भी देख सकेगी।

मास्टर कंट्रोल रूम को कमांड सेंटर बनाया गया
डीएफओ अभिमन्यु ने बताया कि ज्योर्तिमठ में मास्टर कंट्रोल रूम है, उसे कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। जहां पर अभियान से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएंगी। इस जानकारी के आधार पर प्रतिदिन बुलेटिन जारी किया जाएगा। दल के सदस्यों की जानकारी उनके परिवार के लोगों को प्रतिदिन दी जाएगी।
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संचार के इंतजाम
वनाधिकारियों के अनुसार दल के साथ वन विभाग अपना वायरलेस सेट ले गए हैं। संपर्क के लिए सेटेलाइट फोन भी दिया गया है। आईटीबीपी की भी अपने संचार के साधन होंगे। आईएमडी से मौसम की प्रतिदिन जानकारी प्राप्त की जाएगी। साथ ही कोई आपात स्थिति आती है, तो इस के लिए भी जिला प्रशासन के सहयोग कार्य किया जाएगा।

अभियान को पांच वर्ष में भेजने का रखा जाएगा प्रस्ताव
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान हिमालयी जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां होने वाले वैज्ञानिक अध्ययन संरक्षण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इस प्रकार के अभियान संचालित किए जाते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्य में इस अभियान को प्रत्येक पांच वर्ष में आयोजित करने का प्रस्ताव रखने की बात कही, जिससे अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और वन अधिकारियों को इसमें भागीदारी का अवसर मिल सके। इस दौरान अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे, निदेशक पंकज कुमार, बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, डीएफओ अभिमन्यु, पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट सहित कई अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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चार दशक से संरक्षित है नंदा देवी का कोर क्षेत्र
नंदा देवी इनर सैंक्चुरी का मार्ग पहली बार वर्ष 1934 में खोजा गया था। बढ़ती मानवीय गतिविधियों से पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1982 में कोर क्षेत्र में सभी मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। संरक्षण की स्थिति का आकलन करने के लिए प्रत्येक दस वर्ष में वैज्ञानिक अभियान संचालित किया जाता है। पहला अभियान 1993, दूसरा 2003 और तीसरा 2015 में आयोजित हुआ था। वर्ष 2026 में शुरू हुआ यह चौथा जैव विविधता निगरानी अभियान है, जिससे क्षेत्र की वर्तमान पर्यावरणीय स्थिति का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।
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