ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर तीन माह पहले ही अपने मूल केडर जनजाति विभाग में वापस लौटे थे। इसके लिए उन्होंने शासन को पत्र भेजकर विभाग में भेजने का आग्रह किया था। इसी क्रम में शासन ने 26 फरवरी को जारी कर जीत सिंह रावत को जिला समाज कल्याण अधिकारी की कमान सौंपी थी।
उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि छात्रवृत्ति घोटाले व अन्य घोटालों में जिन अधिकारी के नाम आए उनमें अनुराग शंखधर का नाम भी शामिल है। इसके चलते शंखधर ने शासन को पत्र भेजकर अपने मूल कैडर जनजातीय विभाग भेजने का आग्रह किया था। इसके बाद शासन ने शंखधर को मूल कैडर में स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए। मार्च में उपस्थित देने के बाद अनुराग 20 अप्रैल तक छुट्टी लेकर गायब हो गए। 13 अप्रैल को जनजाति विभाग के निदेशक बीआर टम्टा को एसआईटी की तरफ से शंखधर के खिलाफ विवेचना के लिए अनुमति मांगी गई थी। अनुराग के गैरहाजिर होने के कारण विभाग ने उन्हें कई नोटिस भेजे, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला। तीसरा नोटिस शंखधर के गृह जनपद बदायूं भेजा गया है। इसके जवाब में शंखधर ने छुट्टी बढ़ाने का आग्रह किया, लेकिन विभाग ने आग्रह खारिज करते हुए तत्काल उपस्थित होने के निर्देश दिए। साथ ही उनके उपस्थित न होने पर शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा। सख्ती के बाद अनुराग शंखधर 15 मई को विभाग में उपस्थित हुए थे।