बाल आयोग ने मुख्य शिक्षाधिकारी से तलब की रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। चलती स्कूल बस से गिरकर छात्र के घायल होने के मामले में उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आयोग ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मुख्य शिक्षाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही निर्देशित किया है कि वे यह सुनिश्चित कराएं कि स्कूली बसों का संचालन सीबीएसई के मानकों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं? बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने दून हेरिटेज स्कूल के प्रधानाचार्य को भी 22 मई को आयोग में तलब कर स्पष्टीकरण देने को कहा है।
मामले में आयोग अध्यक्ष ने सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी से भी गाइडलाइन के क्रम में अपना पक्ष रखने और मामले की जांच आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी आदेश जारी किया है कि वे अपने स्तर से जांच कर रिपोर्ट आयोग को प्रेषित करें। आयोग अध्यक्ष ऊषा नेगी का कहना है कि सीबीएसई की ओर से 23 फरवरी 2017 को एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश थे। आयोग की ओर से मुख्य शिक्षाधिकारी को आदेश जारी किए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित कराएं कि क्या सीबीएसई की ओर से जारी दिशा निर्देशों का स्कूल संचालक पालन कर रहे हैं या नहीं। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि जिन स्कूलों की बसों में निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है उनके खिलाफ शिक्षा विभाग, पुलिस-प्रशासन व सीबीएसई के अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करें।
उल्लेखनीय है कि दून हेरिटेज स्कूल का छात्र अंश एक दिन पूर्व चलती बस से गिरकर उस समय घायल हो गया था जब वह स्कूल से छुट्टी होने के बाद बस से घर लौट रहा था। घटना के बाद बच्चे के पिता की ओर से स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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मुख्य शिक्षाधिकारी ने भी जारी किया नोटिस
मुख्य शिक्षाधिकारी आशारानी पैन्यूली ने बताया कि बच्चे के चलती स्कूली बस से गिरने के मामले में अभिभावक की ओर से विभाग को कोई शिकायत नहीं की गई है। समाचार पत्रों के माध्यम से ही घटना की जानकारी मिली है। प्रकरण बेहद गंभीर है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। यदि कुछ गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।