तकनीक हमारे लिए जितनी फायदेमंद है, उसके गलत इस्तेमाल से उतने ही नुकसान भी हो सकते हैं। किसी भी तकनीक को अपनाते समय उसके गुण-दोष दोनों को देखने की जरूरत है। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से रूलक में आयोजित संगोष्ठी में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने यह विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि आज कई पढ़े-लिखे लोग भी साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं। जागरूकता न होने के चलते अक्सर हम इसका नुकसान उठाते हैं। उन्होंने कहा कि जो तकनीक समाज के एक बड़े हिस्से के लिए फायदेमंद साबित होती है, वही कुछ गलत हाथों में आने पर लोगों को नुकसान भी करती है। विशेषकर महिलाओं के प्रति साइबर अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। साइबर क्राइम पुलिस की सब इंस्पेक्टर निर्मल भट्ट ने बताया कि पासवर्ड, पिन, ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ डाले गए गलत वीडियो को पुलिस के सहयोग से हटाया जा सकता है।
सब इंस्पेक्टर वेद प्रकाश थपलियाल ने हैकिंग, वायरस प्रसार, सॉफ्टवेयर चोरी, पोर्नोग्रॉफी, आईआरसी अपराध, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, नेट एक्सटॉरशन, फिशिंग, स्पूफिंग, साइबर धोखाधड़ी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। आईसीएफएआई लॉ स्कूल के शिक्षक अवनीश भट्ट ने भारतीय दंड संहिता 1860, महिलाओं का असुरक्षित प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम 1986 समेत अन्य कानूनों के संबंध में जानकारी दी। एसईएडी निदेशक कुसुम घिल्डियाल ने कहा कि सभी को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी जानी आवश्यक है। इस अवसर पर जेएसएस निदेशक जितेंद्र तिवारी, रूलक के अध्यक्ष अवधेश कौशल समेत अन्य मौजूद रहे।