ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
कैबिनेट में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव नहीं आने पर भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने कड़ी नाराजगी जताई है। संघ पदाधिकारियों ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। साथ ही आंदोलन की रणनीति बनाने की चेतावनी भी दी है।
भारतीय चिकित्सा संघ के महासचिव डीडी चौधरी ने बयान जारी कर सरकार के इस पर फैसले पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संघ पहले क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के स्थान पर उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने की मांग कर रहा था। तब सरकार ने संघ के सुझावों के आधार पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन करने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बातचीत में संशोधन पर सहमति व्यक्त की थी। साथ ही मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में संशोधन का प्रस्ताव लाने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन, शुक्रवार को हुई कैबिनेट में यह प्रस्ताव नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से निजी अस्पताल संचालकों में खासी नाराजगी है। संघ पदाधिकारी जल्द ही बातचीत कर आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।