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समयावधि बीती, प्रोफेसर के प्रमोशन का पता नहीं

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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न्यायालय से दिए गए 10 सप्ताह का समय बीतने के बाद भी प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति नहीं हो पाई है। इस बाबत हाईकोर्ट ने 14 जून को आदेश दिया था। हालांकि इस बीच सरकार केवल वरिष्ठतम एसोसिएट प्रोफेसर को सीधे प्रोफेसर पदोन्नत नहीं करने का शासनादेश जारी कर दिया है।
राजकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति की कार्रवाई इसी साल जून में अमल में लाई गई थी। शिक्षक इससे असंतुष्ट थे। शिक्षकों का कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया में यूजीसी रेगुलेशन 2010 का अनुपालन नहीं किया गया। मनमाने तरीके से चयन समिति बनाकर प्रोफेसर पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके खिलाफ अशासकीय महाविद्यालयों के छह शिक्षक हाईकोर्ट चले गए थे। शिक्षकों का आरोप था कि इंटरव्यू में केवल औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। एक वरिष्ठ एसोसिएट प्रोफेसर का तो इंटरव्यू भी नहीं करने का आरोप लगा था। मामले में हाईकोर्ट ने 14 जून को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति में यूजीसी रेगुलेशन का अक्षरश: पालन करने का आदेश जारी किया था। इस बाबत 10 सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए थे।
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अब शिक्षकों ने उच्च शिक्षा के अपर सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक और गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति को पत्र भेजकर जल्द से जल्द यूजीसी रेगुलेशन के तहत चयन समिति का गठन कर प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। इसके अलावा चयन समिति गठित नहीं होने तक प्रोफेसर पदोन्नति पर रोक की मांग की है। इसके अलावा चयन समिति में सदस्यों की संख्या, प्रबंधन का नामित सदस्य, विभागाध्यक्ष या महाविद्यालय के प्राचार्य की भूमिका भी स्पष्ट करने की बात कही है।
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