आपत्तियों पर सुनवाई न होने पर हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों को निर्वाचन अधिकारी द्वारा चुनाव लड़ने की अनुमति देने के विरोध में शिकायतकर्ताओं ने निर्वाचन कार्यालय में हंगामा किया।
शुक्रवार को छह नामांकन पत्रों पर जांच के बाद पांच सही पाए गए, जबकि एक नामांकन निरस्त किया गया। इस मौके पर शिकायतकर्ता केदार सिंह चौहान और सोबन सिंह पंवार का कहना है कि उत्तराखंड शासनादेश 2002 जिसमें सरकारी भूमि में कब्जा कर निर्माण करने वालों को चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति नही दी जाएगी का हवाला देकर सभासद पद पर चुनाव लड़ रहे छह लोगों के नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन निर्वाचन अधिकारी व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी आरोपी पांच लोगों को चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी गई। इस पर जमकर हंगामा किया। इस पर वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
दूसरी और वार्ड 2 से कांग्रेस प्रत्याशी बीना आनंद पर गलत जाति प्रमाण देने का आरोप लगाते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसे निर्वाचन अधिकारी ने आपत्ति को सही पाया गया और वार्ड 2 बार्लोगंज से कांग्रेस प्रत्याशी बीना आनंद का नामांकन निरस्त कर दिया।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि जल्द वे मामले को लेकर न्यायालय की शरण लेंगे। वहीं निर्वाचन अधिकारी सुशील कुमार सैनी ने कहा कि उनके द्वारा सभी शिकायतों पर निर्वाचन के सदस्यों के साथ गहन जांच की गई व नगर पालिका द्वारा दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र को देखते हुए नियमानुसार निस्तारण कर पांच लोगों को चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दी गई जबकि एक के द्वारा गलत जाति प्रमाण देने पर उसका नामांकन निरस्त किया गया।
मसूरी नगर पालिका अधिशासी अधिकारी एमएल शाह ने कहा कि उन पर जो भ्रष्टाचार के आरोप लगाएं जा रहे हैं, वह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत की जांच कराई गई परंतु किसी प्रकार की कब्जा नहीं मिला और जो कुछ है वो न्यायालय में विचाराधीन है। जिन पर अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
एसडीएम मीनाक्षी पटवाल ने कहा कि नामांकन पत्रों की जांच की कई जिसमें 6 लोगों को अध्यक्ष पद पर चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी गई व 63 सभासदों में से एक का नामांकन निरस्त कर 62 लोगों को चुनाव में प्रतिभाग करने की अनुमति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा जो भी निर्णय लिए गए हैं वह नियमानुसार हैं।