ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। गांधी पार्क में बने चिल्ड्रेन पार्क के सामान को खरीदने में बरती गई अनियमितताओं की जांच तीन माह बाद भी ठंडे बस्ते में है। ठेकेदार ने पार्क के लिए 28 हजार रुपये की एक एलईडी खरीदी। जबकि एक कूड़ेदान की कीमत भी 7900 रुपये बताई गई है। इसके बाद नगर आयुक्त ने मामले की जांच अपर नगर आयुक्त को सौंपी थी, लेकिन अभी तक मामले की जांच पड़ताल पूरी नहीं हो पाई है।
अमृत योजना के तहत डेढ़ करोड़ रुपये से गांधी पार्क के भीतर चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया है। जून के अंतिम सप्ताह में इसके लिए खरीदे गए सामान में धांधली की बात सामने आई। पार्क में लगी साधारण बेंच 18 हजार रुपये में खरीदी गई। 120 वॉट की 15 एलईडी की कीमत भी चार लाख 29 हजार रुपये में खरीदी गई। इस बात का खुलासा निवर्तमान पार्षद अजय सिंघल की ओर से लगाए गए सूचना के अधिकार में हुआ था। उसके बाद नगर निगम प्रशासन ने ठेकेदार की शेष 52 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी थी। साथ ही अपर नगर आयुक्त को मामले की जांच के आदेश दिए, लेकिन तीन माह बाद भी मामले की जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रेन साढ़े 12 लाख की और शेड 10 लाख का
चिल्ड्रेन पार्क में जहां ठेकेदार ने साढ़े 12 लाख रुपये की टॉय ट्रेन खरीदी। जबकि इसके शेड की कीमत 10 लाख रुपये बताई जा रही है। इतने छोटे से काम के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च करना दर्शाता है कि कहीं न कहीं खरीदारी में घपला हुआ है।
बाजारी कीमत से अधिक दाम पर सामान खरीदना धांधली की ओर इशारा करते हैं। नगर निगम के अधिकारियों को सामान और उसके बिलों का परीक्षण करना चाहिए था। जांच पड़ताल में देरी समझ से परे है।
- अजय सिंघल, निवर्तमान पार्षद
मामले की जांच पड़ताल चल रही है। इस महीने के अंत तक इसकी रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंप दी जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- नीरज जोशी, अपर नगर आयुक्त