ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून। राज्य के निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम में ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के तहत पंजीकरण कराने व व्यवस्थाएं सुधारने को लेकर शासन, स्वास्थ्य विभाग व निजी डॉक्टरों के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है।
रविवार को आईएमए के प्रदेश महासचिव डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि एक्ट में संशोधन को लेकर सरकार और शासन से उनकी कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों को नहीं माना गया है। सरकार निजी डाक्टरों की समस्याओं को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। सरकार हरियाणा की तर्ज पर 50 बेड के अस्पतालों को एक्ट के तहत पंजीकरण में छूट दें। शुल्क में भी छूट दी जाए। उसके बाद आगे की बात की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निजी अस्पताल संचालकों को नियमानुसार पंजीकरण कराने के साथ-साथ व्यवस्थाएं सुधारनी होगी। दूसरी ओर मामले को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डा नवीन बलूनी ने मंगलवार को एक्ट को लेकर आईएमए में आईएमए पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।
कोट
राज्य के बड़े निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम संचालकों को ‘क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के तहत पंजीकरण कराना चाहिए। अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसमें ढील नहीं दी जा सकती।
-नितेश झा, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार