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पीसीपीएनडीटी एक्ट का पालन कराने में पिछड़ा उतराखंड

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पीसीपीएनडीटी एक्ट का पालन कराने में पिछड़ा उत्तराखंड
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अरविंद सिंह
देहरादून। गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक एक्ट (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के तहत कार्रवाई करने में उत्तराखंड की स्थिति बहुत खराब हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के तहत पिछले एक साल में राज्य में मात्र एक ही मामले में सजा दिलाई गई है। जबकि यहां कई मामले उजागर हो चुकें हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वर्ष 2017-18 की जारी रिपोर्ट के मुताबिक पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने के मामले मेें राजस्थान में 149, महाराष्ट्र में 96, हरियाणा में 78, गुजरात में 18, पंजाब में 31, तमिलनाडु में 28, दिल्ली व उत्तर प्रदेश में 13-13 आरोपी डॉक्टरों को सजा दिलाई गई, जबकि उत्तराखंड में महज एक आरोपी डॉक्टर को सजा हुई। इसके अलावा त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गोवा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में एक भी आरोपी को सजा नहीं दिलाई जा सकी है। जबकि यहां कई मामले पकड़े जा चुकें हैं। पिछले साल ही रुड़की में भी एक मामला पकड़ा गया था, जिसमें हरियाणा के कुछ लोग भ्रूण लिंग जांच कराते पकड़े गए थे।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत महाराष्ट्र में 580, राजस्थान में 679, हरियाणा में 265, गुजरात में 215, बिहार में 130, पंजाब में 145, उड़ीसा में 66, तमिलनाडु में 123, तेलंगाना में 24, पश्चिम बंगाल में 22, मुकदमे पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दर्ज कराए गए हैं।
उत्तराखंड में 54 डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पूरे देश में 2735 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए।
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ये है पीसीपीएनडीटी एक्ट
प्रसव पूर्व गर्भवती की जांच कर यह बताना कि गर्भ में बेटा है या बेटी, कानूनन अपराध है। इसे रोकने के लिए गर्भधारण पूर्व एवं प्रसूति पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत सजा का प्रावधान है। जांच में पहली बार दोष साबित होने पर आरोपी को तीन साल की सजा व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर आरोपी डॉक्टर का पंजीकरण हमेशा के लिए निरस्त किए जाने के साथ ही एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। एक्ट में लिंग परीक्षण कराने को लेकर उकसाने वाले पति व परिवार के सदस्यों को भी तीन साल की सजा व 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
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कोट:
पीसीपीएनडीटी एक्ट को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। सभी सीएमओ को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे समय-समय पर टीम गठित कर डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच कराएं, ताकि भ्रूण परीक्षण करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जा सके। एक्ट का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई भी की गई है।
- युगल किशोर पंत, अपर सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

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