ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
करोड़ों के घाटे में चल रहे पेयजल निगम के अध्यक्ष के पास सूबे के मुख्य सचिव और कैबिनेट मंत्री से भी महंगी कार है। पेयजल निगम ने अध्यक्ष के लिए अधिष्ठान मद से 19.78 लाख रुपये की कार खरीद डाली। जबकि, दस मार्च-2016 के शासनादेश के मुताबिक, कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, डीजीपी और प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) के लिए भी अधिकतम 15 लाख रुपये कीमत की कार खरीदी जा सकती है।
पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने 10 जनवरी 2018 को एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि अध्यक्ष के लिए इनोवा, हेक्सा या समतुल्य मॉडल, प्रबंध निदेशक के लिए इनोवा, सियाज, सिटी होंडा या समतुल्य मॉडल, मुख्य अभियंता के लिए सियाज, वरना, स्कॉर्पियो या समतुल्य, अधीक्षण अभियंता के लिए इंडिगो, अधिशासी अभियंता के लिए बोलेरो कार खरीदी जा सकती है। 10 जनवरी को ही महाप्रबंधक भूजल की ओर से एक पत्रावली शुरू की गई, जिसमें कहा गया कि पेयजल निगम के अध्यक्ष को विभिन्न कार्यक्रमों और यात्रा के लिए वाहन की आवश्यकता पड़ती है। लिहाजा इनोवा, हेक्सा या समतुल्य मॉडल में से एक वाहन खरीदने करने की अनुमति दी जाए। इस पत्रावली पर पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह ने 11 जनवरी को अनुमोदन मांग लिया, जिस पर अध्यक्ष अरविंद सिंह हयांकी ने अनुमोदन दे दिया। इसी दिन मुख्य अभियंता वीसी पुरोहित ने यांत्रिक शाखा के अधिशासी अभियंता को आदेश देकर कहा कि निगम के अध्यक्ष ने कार खरीदने का अनुमोदन दिया है।
इस वाहन को खरीदने के लिए उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली-2017 (वाहन खरीद की प्रक्रिया) के प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही वांछित धनराशि की मांग भी प्रधान कार्यालय को भेजी जाए। 19 जनवरी-2018 को 19,78,150 रुपये कीमत की कार खरीदी गई। जबकि, 10 मार्च 2016 को सचिव सीएस नपलच्याल ने एक शासनादेश जारी किया था, जिसमें साफ किया गया था कि कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और प्रमुख वन संरक्षक के लिए अधिकतम 15 लाख का वाहन ही खरीदा जा सकता है। इस शासनादेश में निगम के अधिकारी के लिए अधिकतम छह लाख के वाहन खरीदने का जिक्र किया गया था। यहां यह बात भी गौर करने वाली है कि पेयजल निगम के अध्यक्ष के पास पहले से ही पेयजल निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई स्कॉर्पियो कार थी। इसके बावजूद इतनी महंगी कार खरीदने पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
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एक अधिकारी को एक कार का अधिकार
उत्तराखंड के शासनादेश के मुताबिक, एक अधिकारी को एक ही स्त्रोत से वाहन का अधिकार होगा। भले ही अधिकारी के पास एक से अधिक विभाग या पद का प्रभार हो।
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शासनादेश के मुताबिक किस अधिकारी को कितने का वाहन
कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव, हाईकोर्ट के जज, अपर मुख्य सचिव, पीसीसीएफ, डीजीपी-15 लाख रुपये
प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, एसीसीएफ और अन्य समकक्ष-12 लाख रुपये
विभागाध्यक्ष, अपर सचिव, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी के अलावा अन्य समकक्ष-8 लाख रुपये
अन्य अधिकृत अधिकारी, निदेशालयों के अधिकारी, निगमों के अधिकारी और समकक्ष आदि-6 लाख रुपये
जनपद स्तरीय अधिकारी और अन्य अधिकृत अधिकारी-6 लाख रुपये
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पेयजल निगम के नियम के हिसाब से अध्यक्ष को इनोवा कार दे सकते हैं। निगम के अध्यक्ष को इनोवा कार लेने का अधिकार है। इसीलिए उनके लिए यह खरीदी गई है। इसमें कुछ गलत नहीं है।
-भजन सिंह, एमडी, पेयजल निगम