सितारगंज की संपूर्णानंद शिविर और केंद्रीय जेल में आजीवन सजा काट रहे 72 कैदियों के लिए यह गणतंत्र दिवस रिहाई का तोहफा ला सकता है। इन कैदियों की फाइल पर शासन स्तर पर विचार चल रहा है। इस पर बृहस्पतिवार को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
बता दें कि पिछले वर्ष जेल प्रशासन ने सजायाफ्ता कैदियों की फाइल आईजी कारागार को भेजी थी। तब से कैदियों की फाइल धूल फांक रही है। हर वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर 14 वर्ष से अधिक जेल में सजा काट चुके कैदियों को रिहा किया जाता रहा है। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में मौजूदा समय में 49 कैदी एवं केंद्रीय कारागार में 512 कैदी (कुल 561) हैं। इसमें से 385 कैदी सजायाफ्ता हैं। वर्ष 2017 में आईजी कारागार डॉ. पीवीके प्रसाद ने जेल का निरीक्षण किया और 14 वर्षों से अधिक सजा काट चुके बीमार एवं बुजुर्ग कैदियों से मुलाकात की थी।
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय जेल के 33 और खुली जेल के 34 आजीवन कारावास के कैदियों की रिहाई के लिए उनकी फाइलों पर विचार विमर्श किया गया था। बाद में 14 वर्ष से अधिक सजा काट चुके पांच अन्य कैदियों की फाइलें भी भेजी गईं थीं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जेल प्रशासन ने कैदियों की सजा माफी की फाइल रिव्यू कमेटी को भेजी थी। इस गणतंत्र दिवस पर उक्त कैदियों की फाइलों पर आजादी की मुहर लगाकर उन्हें रिहा किया जा सकता है। बता दें कि 72 कैदियों में से करीब 12 कैदी सांस, त्वचा रोग, हृदय रोग, टीबी, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं।
वर्ष 2018 में चार कैदियों को मिली थी रिहाई
संपूर्णानंद शिविर के जेलर जितेंद्र पांगती ने बताया कि वर्ष 2018 में दो कैदी गणतंत्र दिवस और दो कैदी स्वतंत्रता दिवस पर रिहा किए गए थे।
कैदियों की फाइलें रिव्यू कमेटी के पास है, जिन पर फैसला लिया जा रहा है। 24 जनवरी को इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि कितने कैदियों को रिहा किया जाएगा।
- डॉ. पीवीके प्रसाद, आईजी, कारागार