दून के अक्षय आनंद भविष्य में ओलंपिक के लिए निशानेबाज तैयार करेंगे। देशभर में 200 शूटिंग कोच में से सात को एक साल की अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग के लिए चुना गया है, इनमें अक्षय भी शामिल हैं।
मूलत: बिहार कटिहार निवासी अक्षय आनंद लंबे समय से दून में निवास कर रहे हैं। बीटेक कर चुके अक्षय पिछले करीब छह वर्षों से शूटिंग कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे अक्षय ने करीब साढ़े तीन साल पहले सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में बतौर शूटिंग कोच कोचिंग की शुरुआत की थी। कोचिंग में अर्जुन सिंह व सौरव क्षेत्री ने सीनियर नेशनल और अंजली चमोला ने एसजीएफआई में पदक जीतने में सफलता हासिल की है।
प्रकाश पादुकोण की खेल प्रमोशनल संस्था ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट पिछले कई वर्षों से ओलंपिक के लिए खिलाड़ी तैयार कर रही है। पिछले दो ओलंपिक में जिन आठ भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते हैं, उनमें से पांच इसी संस्था से जुड़े रहे हैं। अक्षय ने बताया कि संस्था में उनकी एक साल तक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कोचिंग होगी। कई अंतरराष्ट्रीय कोच, खेल विशेषज्ञ और खेल विज्ञानी उन्हें कोचिंग देंगे। इस दौरान स्पोर्ट्स साइंस, अत्याधुनिक उपकरणों, शूटिंग उपकरणों, खानपान से लेकर फिटनेस समेत अन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सबसे कम उम्र के हैं अक्षय
जिन सात कोच को एक वर्षीय प्रशिक्षण के लिए चुना गया है, उनमें अक्षय आनंद (23) सबसे छोटे हैं। वह 51 वर्षीय सुरेश एम. सुबाना और 33 साल के बापू बंजारे के साथ प्रशिक्षण लेंगे। सुरेश एम. सुबाना 2008 के ओलंपिक पदक विजेता विजय कुमार के कोच हैं। बापू बंजारे भारतीय सेना के निशानेबाजी कोच हैं। अन्य चयनित सभी कोच के निर्देशन में भी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं।