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उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पर्व का समापन

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उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पर्व का समापन
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- छठ मइया के भजनों से गूंजे द्रोणनगरी के घाट, देर रात से ही घाटों में लगने लगा श्रद्धालुओं का जमावड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उगतेे सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही बुधवार को छठ पर्व का समापन हो गया। द्रोणनगरी छठ मइया के गीतों से गूंज उठी। इससे पहले मंगलवार देर रात से ही घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह 6:41 बजे व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही सौहार्द व आपसी भाईचारे के साथ ही जगत की खुशहाली की कामना की।
बिहारी महासभा की ओर से छठ पूजा के अवसर पर टपकेश्वर मंदिर के परिसर समीप घाट को विशेष रूप से सजाए गया था। मंगलवार शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद रात करीब दो बजे से ही घाट पर व्रतियों ने पूजा शुरू कर दी थी। साथ ही घाट पर स्नान करने के बाद गीले कपड़ों में ही पूजा-अर्चना की गई। छठ पूजा के लिए चंद्रबनी में परिवार संग आए कपिल देव कनौजिया व राजकुमार कनौजिया आदि ने सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूरा किया। वहीं, टपकेश्वर में अपने परिवार के साथ राम भजन कुमार, मालदेवता में किरन देवी, राजकुमार प्रसाद आदि ने सूर्य को अर्घ्य दिया।
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इसके अलावा पूर्वा सांस्कृतिक मंच की ओर व्यवस्थित किए गए सभी घाटों पर सुबह आरती की गई और जगत कल्याण की कामना की गई। मंच के महासचिव सुभाष झा ने बताया कि रायपुर, मालदेवता, चंद्रबनी, नत्थनपुरा, पुलिया नंबर छह, हरबंश वाला आदि छठ घाटों पर पूजा अर्चना की गई। बृहस्पतिवार को मंच की ओर से घाटों की सफाई के लिए अभियान चलाया जाएगा।
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सूर्यदेव की आराधना की
सूर्य उपासना के पर्व के दिन व्रती महिलाओं ने भगवान सूर्यदेव की आराधना की। आखिरी दिन कार्तिक माह की सप्तमी को सुबह 6:42 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। व्रती महिलाओं ने पीतल के पात्र से अर्घ्य दिया। साथ ही पीतल व तांबे के पात्रों से अर्घ्य किया गया।
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तालाब घाटों पर माहौल हुआ भक्तिमय
नहाय खाय के साथ रविवार को शुरू हुए छठ पर्व के अंतिम दिन पूजा के लिए सजाए गए तालाब और घाटों में मइया की गीतों से माहौल भक्तिमय रहा। व्रतियों ने विधि-विधान से पारंपरिक गीत गाते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। स्वच्छ तालाबों, नदियों समेत कई घाटों पर मिलजुल कर श्रद्धापूर्वक पर्व मनाया गया। शहर में मालदेवता, रायपुर, नत्थनपुरा, पुलिया नंबर छह, हरबंशवाला, सिंहल मंडी, चंद्रबनी आदि में सूर्योपासना के पर्व के लिए सजाए गए घाटों पर छठ मइया के गीत गूंजते रहे। इस मौके पर दर्शन देहू न अपार हे छठी मइया, उग हे सूरजदेव अरघ के बेरिया, सुन ल अरजिया हमार हे छठी मइया... आदि गीतों की धूम रही।
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नंगे पांव घर से घाट तक गए
व्रत के नियमों का विशेष ध्यान रखते हुए व्रतियों ने छठ मइया की आराधना की। चार दिन तक पारंपरिक व लोक गीत गाए गए। श्रद्धालु पूजन सामग्री के डाला को सिर पर रखकर नंगे पांव घर से घाट तक गए। जहां व्रती महिलाओं ने छठ घाट पर पूजा के दौरान पीतल और बांस के सूप में दीपक जलाया।
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टपेकश्वर घाट की सफाई, अन्य की आज होगी
छठ पूजा के लिए बिहारी महासभा की ओर से शहर में चार जगहों में मुख्य रूप से विशेष आयोजन किया गया था। बुधवार को टपकेश्वर मंदिर के निकट तमसा नदी के घाट को महासभा ने साफ कराया। अन्य घाटों की सफाई बृहस्पतिवार को की जाएगी। महासभा के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि टपकेश्वर मंदिर में महासभा की ओर से सजाए गए घाट की कैंट बोर्ड के सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर साफ कर दिया गया। अन्य घाटों पर बृहस्पतिवार को सफाई अभियान चलाया जाएगा। महासभा के सचिव चंदन कुमार झा ने कहा कि इस आयोजन में अन्य समुदाय के लोगों ने भी योगदान दिया। छठ एक ऐसा पर्व है जो लोगों को एक साथ जोड़ता है।

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छठ घाटों पर उमड़े श्रद्धालु

देहरादून। प्रकृति पूजन के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन छठ पूजा में व्रतियों ने मंगलवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। पूर्वा सांस्कृतिक मंच की ओर से व्यवस्थित किए गए छठ घाटों हजारों श्रद्धालु उमड़ पडे़।
मंगलवार दोपहर बाद से ही शहर की सड़कों पर छठ व्रती श्रद्धालु उमड़ पड़े। निजी वाहनों और सिर पर पैदल छठ पूजा का प्रसाद लिए श्रद्धालु निकटवर्ती छठ घाटों की ओर चल पड़े। शाम पांच बजे तक छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। घाट पर पहुंचने के बाद व्रतियों ने सबसे पहले प्रसाद के लिए तैयार किए गए पकवानों को घाटों पर अपने लिए पूर्व निर्धारित स्थानों पर रखा। उसके बाद छठ व्रतियों ने पानी में खड़े होकर सूर्यास्त होने पर भगवान भास्कर को प्रसाद का अर्पण किया और अर्घ्य दिया। शाम करीब 5:23 बजे आरती की गई। आरती के समय जगत कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। आरती के बाद छठ व्रती प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री के साथ घर लौट गए। बुधवार को भोर का तारा दिखने से पहले सभी व्रती फिर से छठ घाटों पर पहुंचेंगे और उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ छठ पर्व का समापन करेंगे।
मंच की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड मूल के प्रवासी लोगों के लिए मालदेवता, रायपुर, नत्थनपुरा, छह नंबर पुलिया, हरबंशवाला, सिंघल मंडी, चंद्रबनी आदि में छठ घाट व्यवस्थित किए गए हैं। मंच की ओर से सभी घाटों पर वालंटियर और घाट प्रभारियों की तैनाती के साथ ही डॉक्टरों की तैनाती भी की गई है। मंच के मीडिया प्रभारी संजय झा ने बताया कि बुधवार को सुबह अर्घ्य देने के बाद सभी घाटों की सफाई की जाएगी। महासचिव सुभाष झा ने बताया कि व्यवस्था बनाने में डॉ. एमके पांडेय, डॉ. अमर उपाध्याय, कंचन ठाकुर, संदीप प्रजापति, अनिल प्रजापति, शारदा, राजू गिरि, शैलेंद्र सिंह, संजय सिंह आदि का सहयोग रहा।
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वहीं पूर्वा सांस्कृतिक मंच ने शहर में 16 छठ घाटों पर व्यवस्था की थी। स्थानीय लोगों के साथ ही सियासी दलों ने भी छठ पूजा में बढ़ चढ़कर भाग लिया। निकाय चुनाव के कई उम्मीदवार मंच के घाटों पर पहुंचे।
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