ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
भारत माता मंदिर के संस्थापक निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की ओर से राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर छह दिसंबर से हरकी पैड़ी पर अनशन करने की घोषणा को भारत साधु समाज के संतों ने राजनीति से प्रेरित करार दिया है।
जयराम आश्रम में हुई भारत साधु समाज की बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बने यह हर हिंदू धर्मावलंबी चाहता है। संत समाज की भावना भी ऐसी ही है, लेकिन अनशन पर बैठने से यह रास्ता नहीं निकलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि देश के वरिष्ठ संत हैं। उन्हें अनशन पर बैठने की नहीं बल्कि आदेश देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद खुद ही कह रहे हैं कि 38 साल पूर्व उन्हें इस मुद्दे पर मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी गई थी। जब से वह कहां थे और देश में भाजपा की सरकार बने हुए भी साढे़ चार साल बीत गए हैं। तब से उन्हें राम मंदिर और अनशन करने की याद नहीं आई। स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि एक राजनीतिक दल विशेष को 2019 में राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत साधु समाज ने केंद्र सरकार से अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण कराने की मांग की है। संत स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को अनशन करने की जरूरत नहीं है। बल्कि उन्हें सभी संतों के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत है।
भारत साधु समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने भी निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का बयान दिया जाना कई तरह के सवाल उठाता है। गौरतलब है कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने सोमवार को कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करने की मांग को लेकर छह दिसंबर से हरकी पैड़ी पर अनशन पर बैठेंगे।
अपने फैसले पर पुनर्विचार करें सत्यमित्रानंद गिरि: नरेंद्र गिरि
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि अनशन पर बैठना और देह त्यागना किसी भी मसले का हल नहीं है। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज वरिष्ठ संत हैं। यदि संत अनशन पर बैठक कर देह त्यागेंगे तो धर्म एवं संस्कृति की रक्षा कैसे होगी। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। संतों का कार्य समाज में सद्भाव का वातावरण बनाकर सन्मार्ग की प्रेरणा देना होता है और भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म की पहचान संत महापुरुषों से है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण निश्चित तौर पर जल्द ही शुरू होगा। जिसके लिए दूसरे पक्ष से अखाड़ा परिषद की ओर से लगातार बातचीत की जारी है। दक्षिण काली मंदिर के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि संत समाज ने मंदिर निर्माण के लिए बिगुल बजा दिया है। संतों की आवाज सरकार को सुननी ही होगी। सभी के सहयोग से जल्द ही श्री राम लला का भव्य मंदिर अयोध्या में बनेगा। यदि आम सहमति से मंदिर नहीं बनता है तो सरकार इसके लिए संसद में कानून बनाकर मंदिर निर्माण का रास्ता खोले।