ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून। रायपुर में प्रस्तावित सचिवालय, विधानसभा भवन और अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए वन विभाग की जमीन के हस्तांतरण में हो रही लेटलतीफी पर केंद्र सरकार की ओर से रिपोर्ट तलब करने पर शासन में अफरातफरी की स्थिति है। आननफानन में संयुक्त सचिव की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
गौरतलब है कि गैरसैंण के अलावा राजधानी दून से सटे रायपुर में भी विधानसभा, सचिवालय भवन के निर्माण के साथ-साथ अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जाना है। इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए बजट का भी प्रावधान कर दिया था, लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक प्रस्तावित निर्माण कार्य तो दूर जमीन का हस्तांतरण तक नहीं हो पाया है। प्रस्तावित भवन निर्माणों के लिए राजस्व विभाग के साथ-साथ वन विभाग की जमीन का भी हस्तांतरण किया जाना है। अब इस संदर्भ में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट मानीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) ने शासन के जरिये अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी है। पीएमजी की ओर से रिपोर्ट तलब करने के बाद शासन से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों में अफरातफरी की स्थिति है। शासन के संयुक्त सचिव वन ने जिलाधिकारी से दो दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। संयुक्त सचिव की ओर से जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से एफआरए (फॉरेस्ट राइट एक्ट) प्रमाणपत्र मांगा गया है । ऐसे में तमाम औपचारिकताएं पूरी कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट भेजी जाए ताकि रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जा सके।