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अब संयुक्त चिकित्सक महासंघ ने भी मोर्चा खोला

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अब संयुक्त चिकित्सक महासंघ ने भी मोर्चा खोला
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के कड़े प्रावधानों के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आंदोलन के एलान के बाद संयुक्त चिकित्सक महासंघ ने भी मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त चिकित्सक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में एक्ट का विरोध करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में डॉक्टरों ने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ बड़े निजी व सरकारी अस्पतालों को ध्यान में रखते हुए बनाया था, ताकि रोगियों को दी जाने वाली सेवाओं में गुणवत्ता के साथ ही पारदर्शिता लाया जा सके। अब इस एक्ट के कड़े और अव्यवहारिक प्रावधानों को उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के छोटे छोटे क्लीनिक पर भी थोपा जा रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि एक्ट में क्लीनिक के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल की बाध्यता, पर्याप्त पार्किंग क्षेत्रफल, शौचालय, प्रशिक्षित स्टाफ व कर्मचारियों की बाध्यता, विकास प्राधिकरणों से मानचित्र की स्वीकृति, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के कड़े प्रावधान किए गए हैं, जो छोटे क्लीनिक संचालकों के लिए संभव नहीं है।
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वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में डॉक्टर कम खर्च में मरीजों को चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि ‘क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ को कड़ाई से लागू किया गया तो उनके लिए मरीजों का इलाज करना संभव नहीं होगा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि जल्द ही महासंघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर छोटे क्लीनिक संचालकों को इस एक्ट से छूट दिलाने की मांग करेगा।
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बैठक में महासंघ के महासचिव डॉ. मुकेश धबलानिया, सचिव डॉ. विश्वजीत वालिया, कोषाध्यक्ष डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. राजीव बंसल, डॉ. जीबी जोशी, डॉ. एम सिंह, डॉ. गगन नाकरा, डॉ. अरशद कमाल, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. इंद्रजीत नंदा, डॉ. भरत पाटिल, डॉ. सुखविंदर शर्मा, डॉ. यूनुस खान, डॉ. इकबाल ग्रेवाल, इंडियन डेंटल एसोसिएशन, नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन, होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन, आयुर्वेद सम्मेलन, यूनानी चिकित्सक संघ के पदाधिकारी व डॉक्टर शामिल थे।
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