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कहीं हादसों का सबब न बन जाएं जर्जर भवन

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ब्यूरो, अमर उजाला, देहरादून
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नगर निगम क्षेत्र में मौजूद 42 जर्जर भवन कभी भी हादसों का सबब बन सकते हैं। मामला कोर्ट में होने के कारण इन भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वहीं, एक साल पहले निगम प्रशासन न इन भवनों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा था। लेकिन, मामला अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा है। राजधानी में बीते दो दिनों से काफी तेज बारिश हो रही है, ऐसे में इन भवनों के गिरने का खतरा फिर से मंडराने लगा है।
निगम के अधिकारियों के मुताबिक जर्जर भवनों पर कार्रवाई नहीं होने की मुख्य वजह किरायेदारों का भवन स्वामी से मुकदमा चलना है। मामला अदालत में होने की वजह से इन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष निगम ने इन भवनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नगर मजिस्ट्रेट को पत्र भी लिखा था। लेकिन, अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह है कि क्या निगम को हादसों का इंतजार है? भवन बरसात के मौसम में कभी भी गिर सकते हैं। बीते अप्रैल में कई भवन स्वामी निवर्तमान मेयर विनोद चमोली से मिलकर जर्जर भवनों को गिराने की गुहार लगाई थी। दिल्ली की रहने वाली सुधा शर्मा और उनकी दून निवासी बहन अर्चना ने अपने कौलागढ़ स्थित जर्जर भवन को गिराने की मांग की थी। लेकिन, वहां कई किरायेदार रहते हैं, जो मकान खाली करने के एवज में रुपये की मांग कर रहे हैं, विवाद के कारण निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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इन जगहों पर हैं जर्जर भवन
नगर निगम क्षेत्र में तहसील चौक, राजा रोड, कनाट प्लेस, तिलक रोड, आढ़त बाजार, झंडा बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, मोती बाजार, घोसी गली, धारा चौकी के पास जर्जर भवन खड़े हैं। ये भवन 70 से 80 साल पुराने हैं।
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जर्जर भवनों को निगम की ओर से नोटिस भेजने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। साथ ही जर्जर भवनों के बाहर बोर्ड भी लगाए जाएंगे। अधिकतर मामले कोर्ट में लंबित होने के कारण हम उन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। - विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
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