ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विभिन्न मांगों पर कार्रवाई नहीं होने और सरकार से वार्ता के लिए समय न मिलने से नाराज राजकीय शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने शनिवार से शिक्षा महानिदेशालय परिसर में क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। पहले दिन संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी और महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माझिला अनशन पर बैठे।
लंबे से विभिन्न मांगों के संबंध में आंदोलनरत राजकीय शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने आर-पार की लड़ाई का एलान किया। पहले दिन अनशन पर बैठे प्रदेश अध्यक्ष केके डिमरी और महामंत्री सोहन सिंह माझिला ने कहा कि शिक्षक संघ डेढ़ वर्ष से सरकार से वार्ता का समय मांग रही है, लेकिन शासन-प्रशासन दोनों की ओर से शिक्षकों की समस्याओं और मांग की अनदेखी की जा रही है। इसके चलते शिक्षकों ने मजबूर होकर क्रमिक अनशन का निर्णय लिया है। पहले चरण के अनशन में केवल प्रांत, मंडल, जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों को शामिल किया जा रहा है। ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो। आमरण अनशन में उपाध्यक्ष मुकेश बहुगुणा, संयुक्त मंत्री योगेश घिल्डियाल, कोषाध्यक्ष अनुज चौधरी, मंडलीय अध्यक्ष रविंद्र राणा, मंत्री हेमंत पैन्यूली, सुभाष झिल्डियाल, नागेंद्र पुरोहित, गोकुल मर्तोलिया, जगदीश बिष्ट, नारायण सिंह, शंकर बोरा, श्याम सिंह सरियाल, प्रदीप भंडारी, राकेश रमोला आदि शामिल रहे।
ये हैं प्रमुख मांगें
एसीपी का लाभ व कोटिकरण विसंगति व वेतन विसंगति दूर करने।
एक्ट के अनुसार ट्रांसफर, पांच छूटे विषयों की काउंसिलिंग कराने।
बेसिक से समायोजित शिक्षकों को चयन प्रोन्न्नत वेतनमान देने।
एक ही विज्ञप्ति के अंतर्गत चयनित एवं कोटद्वार विधानसभा चुनाव के कारण ज्वाइन न कर वाले शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ देने।
अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यक्रमों में न लगाने।
एलटी को लेवल-10 और प्रवक्ता को लेवल-12 दिए जाने।
तदर्थ शिक्षक बंधुओं को पूर्व सेवा का लाभ देते हुए चयन वेतनमान, 400 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में उप प्रधानाचार्य का पद सृजित करने।
महिलाओं को 15 दिन का सीसीएल प्रदान करने की अनुमति प्रधानाचार्य को देने।
बोर्ड से अनुमोदित व्यायाम व कला के प्रवक्ता पद पर स्वीकृत।