ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने निर्देश दिए कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आंशिक और स्वैच्छिक चकबंदी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। जोत चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 2018 व प्रस्तावित नियमावली के लिए गठित समिति ने कृषि भूमि को व्यावसायिक रूप से परिवर्तन करने पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाने का सुझाव दिया।
बुधवार को विधानसभा में चकबंदी बंदोबस्त समिति की बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आंशिक और स्वैच्छिक चकबंदी करने से किसानों को एक ही जगह पर खेतीबाड़ी के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होगी। वहीं किसानों की दोगुनी आय करने के लिए सरकार की योजनाएं भी साकार होंगी। बैठक में राजस्व विभाग की ओर से तैयार चकबंदी पर आधारित डाक्यूमेंट्री का अवलोकन किया। मंत्री ने निर्देश दिए कि डाक्यूमेंट्री को आकर्षक बनाया जाए। ताकि लोग इसे देख सके। डाक्यूमेंट्री बनाने में विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाए।
बैठक में जोत चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 2018 और प्रस्तावित नियमावली के लिए गठित समिति ने अवगत कराया कि बैनामा, दाखिल खारिज से लेकर खाता खतौनी का मिलान कर गांव के लोगों की सहमति से चकबंदी के कार्यों में तेजी लाई जा सकती है। समिति ने सुझाव दिया कि कृषि भूमि को व्यावसायिक रूप में परिवर्तन करने वाले लोगों से 10 प्रतिशत कृषि कर (टैक्स) व आवासीय प्रयोग वाली भूमि पर दो प्रतिशत कर लेने का प्रस्ताव किया जाए। ताकि कृषि भूमि के दुरुपयोग पर रोक लग सके। इसके अलावा उप जिलाधिकारियों को अधिकार दिए जाएं कि गवाहों की तहकीकात व सुनवाई करते हुए जमीन के वास्तविक मालिक का पता लगाया जाए।
कृषि मंत्री ने कहा कि लखौली, औणी, पंचूर व खैरासैंण गांव से चकबंदी की शुरूआत की गई। इन गांवों में चकबंदी समितियों का गठन व खाता खतौनियों का सत्यापन कर लिया गया है। डिजिटल सर्वे के लिए मशीनों को खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। बैठक में कृषि सलाहकार नेत्रमणी मलासी, निदेशक (कृषि) गौरीशंकर, निदेशक (उद्यान) आरसी श्रीवास्तव, अपर निदेशक (कृषि) केसी पाठक, प्रभारी राजस्व परिषद विप्रा त्रिवेदी, संयुक्त सचिव कृष्ण सिंह आदि मौजूद थे।