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...तो पुरानी फीस पर ही होंगे मेडिकल में एडमिशन

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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गैर सहायता प्राप्त निजी चिकित्सा शिक्षण संस्थानों के लिए बनाई गई प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति को निरस्त करने के हाईकोर्ट के निर्णय के बाद मेडिकल फीस पर असमंजस बढ़ गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फीस निर्धारण न होने तक पुरानी फीस पर ही एडमिशन होंगे। वहीं पिछले कुछ वर्षों की तर्ज पर छात्रों को एडमिशन के समय शपथ-पत्र भरना होगा।
प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों की काउंसिलिंग 25 जून से होनी है। कुछ दिन पूर्व ही हिमालयन मेडिकल कॉलेज ने हाईकोर्ट से मिली राहत के आधार पर स्वामी राम हिमालयन विवि की ओर से तय शुल्क वसूलने का दावा किया था। वहीं एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज सरकार से वार्ता के बाद तय होने वाली फीस पर ही एडमिशन देने की बात कही। इससे पहले अप्रैल में हुई पीजी काउंसिलिंग के दौरान निजी कॉलेजों में शुल्क को लेकर विवाद हुआ था। कॉलेजों ने पहले तो अपने स्तर से शुल्क वृद्धि कर दी थी, फिर सरकार के हस्तक्षेप के बाद पुरानी शुल्क पर ही दाखिले किए गए। यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया था।
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पिछले वर्ष की एसजीआरआर की पांच लाख रुपये फीस के आधार पर ही निजी कॉलेज की फीस तय की गई। इसके बावजूद कुछ कॉलेजों ने ज्यादा फीस ली। यह मामला कोर्ट में पहुंचा। तब निजी कॉलेजों ने शपथ-पत्र दिया कि फीस निर्धारित होने पर वह वही फीस लेंगे, जो सरकार तय करेगी। वहीं, पीजी में क्लीनिकल व नॉन क्लीनिकल कोर्स के लिए साढ़े सात से साढ़े दस लाख रुपये फीस तय की गई थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि जब तक फीस निर्धारित नहीं होती, तब तक पुराना शुल्क ही लिया जाएगा।
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दोनों मेडिकल कॉलेज विवि का दर्जा ले चुके हैं। काउंसिलिंग के समय वह हमेशा तर्क देते हैं कि वह खुद ही फीस निर्धारित करेंगे। हमने सरकार से दिशा-निर्देश मांगे थे। अब कोर्ट के निर्णय के बाद स्थितियां बदल जाएंगी। सरकार से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। एडमिशन के समय तक कोई फैसला नहीं हुआ तो पुरानी फीस ही ली जाएगी।
-डॉ. आशुतोष सयाना, अपर निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जो भी नियमानुसार होगा, वही किया जाएगा।
-डॉ. विजय धस्माना, कुलपति, स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी
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अभी शुल्क के मामले में सरकार के साथ वार्ता चल रही है। हम सरकार से निर्धारित फीस पर एडमिशन देने की बात कह चुके हैं। सरकार जो भी निर्धारित करेगी, उसके अनुसार ही फीस ली जाएगी।
-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज
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प्रदेश में इन कॉलेजों में मिलेगा एमबीबीएस दाखिला
कॉलेज का नाम सीटें
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज 122
राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर 85
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी 85
हिमालयन मेडिकल कॉलेज, जौलीग्रांट 100
एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज, देहरादून 150
(निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय प्रबंधन कोटे की हैं।)
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तीन साल में भी फीस निर्धारित नहीं कर पाई समिति
-बीडीएस और कुछ निजी कॉलेज के चुनिंदा पाठ्यक्रमों की फीस की थी निर्धारित

अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
सरकार ने गैर सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं के पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित करने के लिए जो समिति गठित की, उसका कार्यकाल खास उपलब्धियों भरा नहीं रहा। समिति के पास बीते वर्ष बीडीएस पाठ्यक्रम और कुछ निजी कॉलेज के चुनिंदा पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित करने के अलावा कुछ भी बताने लायक नहीं है।
समिति पूरी तीन साल में निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस निर्धारित नहीं कर सकी। इसके चलते सरकार और मेडिकल कॉलेजों के बीच लगातार टकराव होता रहा। कुछ माह पूर्व एमबीबीएस और एमडी-एमएस की पढ़ाई की फीस को लेकर सरकार और निजी मेडिकल कॉलेजों के बीच टकराव बढ़ गया था, जब समिति ने एक निजी मेडिकल कॉलेज पर 10 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से जुर्माना लगा दिया था।
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छात्र-अभिभावक रहे परेशान
शुल्क का निर्धारण न होने के कारण विभिन्न संस्थानों ने मनमानी फीस वसूली। मेडिकल कॉलेज भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। इस बाबत छात्र-छात्राओं से एक शपथ-पत्र भरवाया जाता है कि समिति जो फीस तय करेगी, वही ली जाएगी। यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है।
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