अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्रावण मास के कांवड़ मेले की तैयारी के लिए मेला क्षेत्र को अवैध अतिक्रमण से मुक्त करने का अभियान की अफसरों के बीच तालमेल नहीं होने कारण हवा निकल गई । सिंचाई विभाग के जिस अधिकारी ने अभियान का खाका तैयार किया था वह देहरादून में अपने नए तैनाती स्थल पर चार्ज लेने पहुंच गए। अपनी जगह किसी और अधिकारी को अभियान की जिम्मेदारी भी नहीं दी। वहीं प्रशासन से मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मांगने के लिए लिखे पत्र पर भी कोई संज्ञान नहीं लिए जाने से न तो मजिस्ट्रेट मिला और न ही पुलिस बल।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने पिछले दिनों बैरागी कैंप का निरीक्षण करते हुए वहां सरकारी आरक्षित मेला भूमि को अवैध कब्जे देखकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने बड़े भूभाग को अतिक्रमण से पाट दिए जाने पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता व राजस्व अधिकारी का वेतन रोकने और कांवड़ मेले से पहले अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बैरागी कैंप सहित संपूर्ण कांवड़ मेला क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने कार्ययोजना बनाई थी। उन्होंने जिलाधिकारी को अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त करने और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को अभियान के दौरान पुलिस की सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी लिखा था। अभियान बृहस्पतिवार को बैरागी कैैंप से शुरू होना था। बुधवार की शाम तक सिंचाई विभाग के अधिकारी पूरी तैयारी में थे लेकिन बृहस्पतिवार की सुबह सारे दावेेेे हवाई हो गए।
पत्र लिखा तो पैरवी भी तो करते
जिलाधिकारी दीपक रावत ने सिंचाई विभाग के अफसरों की ओर से मजिस्ट्रेट की तैनाती और फोर्स उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखे जाने के बारे में बताया कि पत्र लिखने का उन्हें तो पता भी नहीं है, लेकिन उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया। यदि कोई अधिकारी संपर्क करता या फोन पर भी बात करता तो मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराया जाता। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने भी बताया कि उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया खाली पत्र लिखने से काम नहीं होता।
नगर निगम ने भी पीछा मारा
इससे पूर्व मंगलवार को रोडी बेलवाला में गऊघाट पुल को जाने वाली सड़क के दोनों ओर से अवैध दुकानों के अतिक्रमण को हटाने की नगर निगम ने योजना बनाई थी। महापौर मनोज गर्ग के निर्देश पर सहायक नगर अधिकारी बीएल आर्य ने जेसीबी, लेबर तथा सामान जब्त करने के लिए ट्रक मौके पर भेज दिया था लेकिन कार्यवाही शुरू होती इससे पहले ही महापौर ने फोन कर एसएनए को अतिक्रमण हटाने से रोक दिया।