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महिला अस्पताल बढ़ा रहा महिलाओं का दर्द

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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
महिला अस्पताल में हर रोज दो से ढाई सौ महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इन महिलाओं के स्वास्थ्य का जिम्मा केवल दो महिला चिकित्सकों पर है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

प्रदेश का निजाम बदले करीब तीन महीने होने वाले हैं। प्रदेश में सरकार ही बदली व्यवस्थाओं की तस्वीर नहीं। सबसे बुरा हाल स्वास्थ्य सुविधाओं का है। दूर दराज की बात छोड़ भी दें तो शहरों के अस्पताल की हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ी है। हरिद्वार के जिला अस्पताल के साथ महिला अस्पताल की ओपीडी चुनिंदा डाक्टरों की भरोसे चल रही है। जबकि इन अस्पतालों पर शहर के अलावा आसपास के देहात का जिम्मा भी है।
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महिला अस्पताल में इन दिनों दो ओपीडी ही चल रही हैं। हर रोज यहां दो से ढाई सौ महिलाएं उपचार करवाने आती हैं। इसमें अस्पताल में पंजीकृत 50 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। सोमवार को महिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं देखने को मिली। अन्य दिनों के मुकाबले में सोमवार ज्यादा महिलाएं जांच करवाने पहुंची थी। सुबह दस बजे ही अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं का नंबर 12 बजे तक नहीं आया था। दोनों महिला चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। सुभाषनगर से अपनी पत्नी को लेकर पहुंचे सुधीर ने बताया कि 10 बजे से पहले पर्चा बनवाकर ओपीडी में जमा करा दिया था। उनका कहना था कि पहले से ही बड़ी संख्या में पर्चे जमा थे। उन्होंने बताया कि दो घंटे बाद भी नंबर नहीं आया। यही हाल अन्य मरीजों का था। मरीजों के साथ आए उनके परिजन भी परेशान नजर आए।


हाल ए महिला अस्पताल
महिला अस्पताल को 24 घंटे चलाने के लिए मात्र चार डाक्टर हैं। इनमें से दो डाक्टर बाल रोग विशेषज्ञ और दो स्त्री रोग विशेषज्ञ है। इनमें से डा. संदीप निगम बच्चों की देखभाल करने के साथ-साथ सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। रात में इमरजेंसी ड्यूटी करने के चलते हुए दिन में केवल दो ही ओपीडी चल पा रही हैं। ऐसे में अस्पताल में प्रतिदिन 250 से अधिक गर्भवतियों को देखना और प्रतिदिन 10 से 12 प्रसव कराना मुश्किल हो रहा है।


कहां गएं वो प्रदर्शन करने वाले
कांग्रेस के शासनकाल में अस्पतालों में डाक्टर न होने पर भाजपा नेता हर दिन धरना प्रदर्शन करने पहुंच जाते थे। तब सरकार पर व्यवस्था सुधारने में असफल होने का आरोप लगाते थे। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बन चुकी है और ढाई महीने का कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन अब भाजपा नेताओं को गर्भवतियों के साथ अन्य मरीजों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा है।
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स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य महानिदेशक को महिला अस्पताल की स्थिति से अवगत कराते हुए डाक्टरों की मांग की गई, प्रत्येक बार डाक्टर भेजने का आश्वासन देते हैं। डाक्टर न होने से जितना बनता है वे कर रहे हैं, लेकिन गर्भवतियों के मर्ज को देखते हुए भी शासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
- डा. भवानी पाल, सीएमएस, महिला अस्पताल।
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