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इस नन्हें 'टाइगर' से हारा गुलदार, पांच मिनट की जंग में पस्त होकर भागा

Wed, 26 Oct 2016 11:21 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
उत्तरकाशी के दूरस्थ गांव में सात साल के अर्जुन की बहादुरी देख खूंखार गुलदार को मैदान छोड़ उल्टे पांव भागना पड़ा। सोमवार शाम खेलकर घर लौट रहे अर्जुन पर गुलदार ने हमला किया तो उसका साथी भाग निकला, लेकिन पांच मिनट से खूंखार जानवर के सामने अर्जुन अकेला डटा रहा। 7वीं स्लाइड में देखें वीडियो
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
बुरी तरह से घायल होने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। गुलदार अर्जुन पर हावी होता इससे पहले गांव वाले पहुंच गए। इसके बाद आठ किलोमीटर तक पीठ पर लादकर सड़क पर पहुंचे तो उन्हें 108 एंबुलेंस मिली। प्राथमिक इलाज के बाद देर रात अर्जुन दून अस्पताल पहुंच गया।
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
उत्तरकाशी के ग्राम गैर मुगासंथी बड़कोट निवासी अर्जुन के पिता पिता शोभन सिंह राणा ने बताया कि अर्जुन सोमवार शाम करीब पांच बजे अपने एक दोस्त के साथ खेलकर वापस घर को आ रहा था। इसी दौरान रास्ते की झाड़ी में घात लगाकर बैठे एक गुलदार ने अर्जुन पर हमला कर दिया।

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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
उत्तरकाशी के ग्राम गैर मुगासंथी बड़कोट निवासी अर्जुन के पिता पिता शोभन सिंह राणा ने बताया कि अर्जुन सोमवार शाम करीब पांच बजे अपने एक दोस्त के साथ खेलकर वापस घर को आ रहा था। रास्ते में एक गुलदार झाड़ी में घात लगाए बैठा था, जिसने बच्चों को आसान शिकार मानकर अर्जुन पर हमला कर दिया।
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
गुलदार को देखकर उसका साथी भागते हुए गांव पहुंचा और हमले की सूचना दी। इधर अर्जुन करीब पांच मिनट तक गुलदार से अकेला जूझता रहा। जब ग्रामीण पहुंचे तो गुलदार को उल्टे पांव भागना पड़ा। इस दौरान गुलदार ने अर्जुन के सिर, हाथ, कमर, पीठ पर हमला कर बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। उसके सर पर गहरे घाव आए थे।
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
इसके बाद प्राथमिक उपचार के बाद अर्जुन को देहरादून लाया गया। सिर पर आई चोट कर कारण अर्जुन बात करने की स्थिति में नहीं है। हालांकि डाक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है।
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
अर्जुन परिवार में सबसे छोटा है। इससे बड़ा एक भाई और दो बहने है। पिछले साल कैंसर की वजह से मां की मृत्यु हो गयी थी।
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Arjun fight with leopard - फोटो : AmarUjala
न सड़क न स्वास्थ्य सेवाएं
इस घटना के बाद क्षेत्रवासियों में सरकार के प्रति काफी रोष है। लोगों का कहना है कि आज तक इस गांव की सड़क नहीं बनी, जबकि हर बार सर्वे हुआ। सड़क नहीं होने से इलाज के लिए भी कोई सुविधा नहीं हैं। अर्जुन को आठ किलोमीटर तक पीठ पर लाद कर लाए जबकि उसके सिर से लगातार खून बह रहा था।
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