ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। बाल आयोग कार्यालय में आयोजित बैठक में आयोग अध्यक्ष उषा नेगी ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के प्रति बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए विभिन्न विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से भी विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कई पत्र भेजे गए, बावजूद इसके अधिकारी गंभीर नहीं है।
उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2018 को छह माह के भीतर राज्य सरकार को दिव्यांग बालक-बालिकाओं को विभिन्न सुविधाएं देने के आदेश दिए गए थे। लेकिन, 10 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को बाल आयोग अध्यक्ष उषा नेगी ने समाज कल्याण, परिवहन, शिक्षा, खेल समेत विभिन्न विभाग के अधिकारियों की नंदा चौकी स्थित आयोग कार्यालय में बैठक ली। इस दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि वर्ष 2009-10 में सरकारी स्कूलों में 22,930 दिव्यांग बच्चे पंजीकृत थे। उच्च न्यायालय में दाखिल शपथपत्र में संख्या 13,662 बताई गई। जबकि मौजूदा समय में शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध सूचना के तहत इनकी संख्या 6391 है। इससे साफ है विशेष शिक्षकों की नियुक्ति न होने के चलते 18000 दिव्यांगों ने स्कूल छोड़ दिया है। शिक्षा विभाग की ओर से मौजूद अर्जुन फलिना ने बताया कि 47 विशेष शिक्षक नियुक्त कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। सीबीएसई बोर्ड की ओर से पहुंची सहायक सचिव ने बताया कि वर्ष 2020 में बोर्ड के सभी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति कर ली जाएगी।
29 मई को घनशाली, टिहरी गढ़वाल में दिव्यांगों के लिए आयोजित निशुल्क शिविर में आयोग अध्यक्ष ने सभी अधिकारियों को शामिल होने को कहा। उन्होंने अगली बैठक में सभी अधिकारियों को होमवर्क के साथ पहुंचने के निर्देश दिए। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने परिवहन विभाग से पहुंचे उप परिवहन आयुक्त सुधांशु गर्ग, खेल एवं युवा कल्याण के निदेशक प्रताप सिंह शाह, एनआईवीएच से पहुंचे जगदीश लखेड़ा और हिम्मत सिंह समेत अन्य अधिकारियों को भी कई निर्देश दिए। बैठक में आयोग सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, अनु सचिव रोशनी सती आदि अधिकारी मौजूद रहे।
आदेश के बाद भी क्यों नहीं दे रहे पूरी छात्रवृत्ति ?
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद दिव्यांग छात्र-छात्राओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये छात्रवृत्ति क्यों नहीं दी जा रही है। अब तक भी उन्हें 50 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी डी. घिल्डियाल एवं सहायक समाज कल्याण अधिकारी संदीप सिंह ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस पर आयोग अध्यक्ष ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं को दोबारा चिह्नित कर नए सिरे से छात्रवृत्ति देने के निर्देश दिए।
नहीं बन रहे प्रमाणपत्र
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सीमा आर्य ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष 6552 दिव्यांग बच्चों को प्रमाणपत्र बांटे गए हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए आयोग अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण कई प्रमाणपत्र अब तक नहीं बने हैं। उन्होंने इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए।