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जो प्रयास हो सकते हैं करो, मुझे समाधान चाहिए : मुख्यमंत्री

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। बल्लीवाला फ्लाईओवर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस फ्लाईओवर पर हो रही दुर्घटनाओं पर हर हाल में अंकुश लगना चाहिए। इसका मौजूदा डिजाइन ही हादसों का सबसे बड़ा कारण है। मुझे इसका समाधान चाहिए। आप लोग विकल्पों पर काम करिए। सरकार के पास बजट की कमी नहीं है।
बल्लीवाला फ्लाईओवर बनने के बाद से ही इस पर लगातार हादसे हो रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए मांग उठ रही है। इसी को देखते हुए सोमवार दोपहर मुख्यमंत्री फ्लाईओवर का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ फ्लाईओवर के बीच में वह स्पॉट भी देखा, जहां अब तक सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को फ्लाईओवर की डिजाइनिंग एवं बेहतर तकनीकी सहयोग के लिए विशेषज्ञों से परामर्श लेने के निर्देश दिए। साथ ही दुर्घटनाओं के बढ़ते कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हादसे रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए स्थाई समाधान की जरूरत है। यह तभी संभव होगा जब फ्लाईओवर का डिजाइन सही होगा। उन्होंने अधिकारियों को इस पर काम करने के निर्देश दिए साथ ही कहा कि इसके लिए बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी।
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एनएच के मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा ने बताया कि जीएमएस रोड की ओर से बल्लूपुर जाने की ओर फ्लाईओवर की लंबाई कम से कम 200 मीटर बढ़ानी होगी। इससे वाहन सवार को दिक्कत नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान मेयर सुनील उनियाल गामा, कैंट विधायक हरबंस कपूर, पार्षद अमिता सिंह, दिनेश रावत समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

आज से लगेंगे रंबल स्ट्रिप
एनएच के मुख्य अभियंता हरिओम शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर फ्लाईओवर पर वाहनों की गति पर नियंत्रण रखने के लिए मंगलवार रात से सात-आठ जगह रंबल स्ट्रिप लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा। ये रंबल स्ट्रिप बांयी ओर यानि बल्लूपुर से जीएमएस रोड की ओर जाने वाले हिस्से में लगेंगे।

सीएम ने भी माना फ्लाईओवर का चौड़ीकरण ही समाधान
देहरादून। बल्लीवाला फ्लाईओवर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी माना कि फ्लाईओवर का चौड़ीकरण ही हादसों पर अंकुश का समाधान है। लेकिन, बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष ही इस फ्लाईओवर को चौड़ा करने के आदेश दिए थे। इस पर विभाग ने 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन, वित्तीय संकट का हवाला देते हुए शासन ने प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यदि शासन पहले ही बजट जारी कर फ्लाईओवर को चौड़ा कर देता तो शायद अब तक हादसों पर अंकुश लग चुका होता।
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मालूम हो कि फ्लाईओवर पर बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए पिछले वर्ष मार्च में हाईकोर्ट ने इस फ्लाईओवर को चौड़ा करने के आदेश दिए थे। उसके बाद टेक्निकल कंसलटेंसी सर्विसेज को कंसलटेंट नियुक्त किया था। उसने अपनी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग और राजमार्ग यूनिट को भी दी थी। इसमें उसने फ्लाईओवर को बल्लूपुर से जीएमएस रोड की ओर चौड़ा करने का सुझाव दिया था। इसको लेकर मई-जून में करीब 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। लेकिन, बजट जारी न होने के चलते चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया। कंसलटेंट ने फिजिबिलिटी स्टडी के बाद रिपोर्ट सौंपी थी। उसके बाद 120 करोड़ रुपये से फ्लाईओवर को चौड़ा किया जाना था। लेकिन, बजट के अभाव में यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
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