ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
नगर निगम की ओर से एनओसी नहीं मिलने से शीशबाड़ा स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का प्रस्ताव नौ महीने से अटका हुआ है। रैमकी कंपनी की ओर से करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाया जाना है। इसमें कूड़े की प्रोसेसिंग से निकले आरडीएफ (रिफ्यूज ड्राइव फ्यूल) के जरिए बिजली बनाई जानी है।
पिछले वर्ष अप्रैल में रैमकी कंपनी ने शीशमबाड़ा प्लांट में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया था। इसे लेकर विभिन्न विभागों ने अपनी एनओसी दे दी थी। वहीं, केवल नगर निगम से एनओसी मिलना बाकी है। उधर, पिछले वर्ष इन्वेस्टर्स समिट में भी कंपनी ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाने को लेकर एमओयू साइन किया था। इसके बावजूद अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनने से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में आने वाले कूड़े का निस्तारण पूरी तरह से हो सकेगा। वहीं, प्लांट से आ रही थोड़ी बहुत बदबू भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
प्लांट हेड मोहित द्विवेदी ने बताया कि शीशमबाड़ा में छह मेगावाट का एनर्जी प्लांट लगाने की योजना है। प्लांट में आरडीएफ के जरिए बिजली उत्पन्न कर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन को दिया जाएगा। बताया कि नगर निगम से एनओसी मिलने के बाद प्लांट का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पावर प्लांट के निर्माण में करीब दो साल का समय लगेगा। इसमें करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसका भुगतान कंपनी करेगी। प्लांट बनने से देहरादून के अलावा हरबर्टपुर, विकासनगर, सेलाकुई, मसूरी और डोईवाला के कूड़े का निस्तारण कर अधिक से अधिक मात्रा में बिजली बनाई जाएगी।
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नगर निगम से एनओसी के मिलते ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन को दिया जाएगा।
- मोहित द्विवेदी, प्लांट हेड, रैमकी कंपनी
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कंपनी की ओर से दिए गए प्रस्ताव की जानकारी है। इसका अध्ययन किया जा रहा है, इसके बाद सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने की अनुमति कंपनी को दी जाएगी।
- सुनील उनियाल गामा, मेयर