उत्तरकाशी। पौड़ी जिले में युवक द्वारा जिंदा जलाई गई युवती की मौत के बाद पर्वतीय जिलों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अपराध के लिहाज से अमूमन शांत माने जाने वाले पहाड़ी जनपदों में हो रही घटनाओं के लिए पुलिस एवं सरकार की कार्यप्रणाली से अधिक समाज में फैल रही कुरीतियां जिम्मेदार हैं, जिन्हें अगर समय रहते दूर नहीं किया गया तो महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
पुलिस क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों को देखें तो जनपद में ही बीते दो सालों के भीतर महिला अपराध के कुल 74 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से बलात्कार के 17 व छेड़छाड़ के करीब 11 मामले शामिल हैं। डुंडा ब्लॉक में नाबालिग बच्ची की बलात्कार के बाद की गई निर्मम हत्या व भटवाड़ी ब्लॉक में शिक्षकों द्वारा अपनी छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने की घटनाओं ने तो सबको हिला दिया था।
चाइल्ड लाइन 1098 के समन्वयक दीपक उप्पल ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के लिए सबसे अधिक समाज की रूढ़ीवादी मानसिकता जिम्मेदार है। आज भी छेड़छाड़ व यौन अपराध की किसी घटना के दौरान उसे बदनामी से बचने के लिए चुप रहने की नसीहत दी जाती है, जबकि इसके विपरीत अगर बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें गलत के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिया जाए, तो वे इस तरह के हालातों से निपट सकती हैं। क्षेत्र की पवना सेमवाल ने कहा कि यौन अपराधों के अधिकांश मामलों में पीड़ित का कोई करीबी जानकार ही दोषी पाया जाता है। इसलिए लोगों को अपने बच्चों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार कर हर गलत सही की जानकारी लेनी चाहिए। शासन प्रशासन को भी दोषियों को कठोर सजा देकर अपराधियों के मन में खौफ पैदा करना चाहिए।