शहरी क्षेत्रों में भारी पेड़ों के कटान पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजधानी दून समेत राज्य के सभी छोटे बड़े शहरों में विकास कार्यों के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद उपयोगी बरगद, पीपल, पिलखन के पेड़ों के काटने पर शासन व वन निदेशालय के स्तर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अति संवेदनशील इन प्रजातियों के भारी पेड़ों को काटने के बजाय अत्याधुनिक मशीनों से पुन:स्थापित किया जाएगा। दूसरी ओर इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक जयराज की ओर से सभी अपर प्रमुख वन संरक्षकों, मुख्य वन संरक्षकों, वन संरक्षकों व सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।
प्रमुख वन संरक्षक जयराज की ओर से जारी किए गए आदेश में शासनादेश का हवाला देते हुए निर्देशित किया गया है कि सड़कों के निर्माण समेत तमाम विकास कार्यों के लिए यदि बरगद, पीपल और पिलखन को काटने की नौबत आती है तो इन्हें काटने के बजाय अत्याधुनिक मशीनों से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। इससे पहले इसकी जानकारी निदेशालय को मुहैया करायी जाए। प्रमुख वन संरक्षक का यह भी कहना है कि पेड़ों को शिफ्ट करने में जो भी खर्च आएगा, वह वन विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि दून के अलावा राज्य के तमाम शहरों में बड़े पैमाने पर पीपल, बरगद समेत कई प्रजातियों के भारी पेड़ों को विकास के नाम पर काटा जा रहा है, जिसका असर सीधा असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। वैसे तो पेड़ों के संरक्षण को लेकर तमाम कानून हैं लेकिन विकास के नाम पर पर्यावरण संरक्षण कानूनों की भी अनदेखी की जा रही है। अब जबकि शासन व वन निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं उम्मीद है कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से संवेदनशील बरगद, पीपल जैसे पेड़ों को काटने से रोका जा सकेगा।