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सीबीआई जांच पर रोक लगाए जाने से अफसरों ने ली राहत की सांस, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने शासन को भेजी रिपोर्ट

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सीबीआई जांच पर रोक से अफसरों ने ली राहत की सांस
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व व जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में पिछले पांच साल के भीतर बाघों व गुलदार की मौत के मामलाें की सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाए जाने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली है। शीर्ष अदालत की ओर से रोक लगाए जाने के बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले माह हाईकोर्ट ने राजाजी टाइगर रिजर्व व जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में पिछले पांच साल के भीतर बाघों व गुलदार की मौत के मामलाें की सीबीआई जांच कराए जाने का आदेश जारी कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच भी शुरू कर दी। सीबीआई की दो टीमों ने राजाजी टाइगर रिजर्व व जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में जांच के लिए हल्द्वानी व देहरादून में डेरा भी डाल लिया। प्रकरण की सीबीआई जांच शुरू होने के साथ ही विभागीय अफसरों, कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति थी। प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई ने कई अफसरों, कर्मचारियों को तलब कर पूछताछ भी की। बाघों व गुलदारों की मौत से जुड़ी तमाम अहम जानकारियां भी जुटायी। जांच को लेकर खेमों में बंटे विभागीय अधिकारियों में इस बात को लेकर चर्चा रही कि अब जबकि सीबीआई जांच कर रही है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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इस बीच पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीबीएस खाती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीबीआई जांच पर रोक लगा दी। जांच पर रोक लगाए जाने के बाद विभागीय अफसराें, कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। सूत्रों की मानें तो कई विभागीय अफसरों, कर्मचारियों को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि सीबीआई जांच में उसकी भूमिका उजागर हो जाए और उन्हें मुसीबत का सामना करना पड़ जाए। सीबीआई जांच को लेकर पूरे महकमे में चर्चाआें का दौर जारी है।
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक मोनिष मल्लिक ने बताया कि सीबीआई जांच पर रोक लगाए जाने संबंधी अदालत के आदेश के बाद शासन को अवगत करा दिया गया है। अब शासन पर निर्भर करता है कि आगे क्या कार्रवाई की जाती है?
उल्लेखनीय है कि राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदार की मौत को लेकर सीबीआई के अलावा शासन के आदेश पर एसआईटी व विभागीय स्तर पर भी जांच जारी है।
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