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निदेशक के आश्वासन पर शिक्षा मित्रों का आमरण अनशन खत्म

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 11 दिनों से निदेशालय में चल रहा शिक्षा मित्रों का आमरण अनशन खत्म हो गया। सोमवार को निदेशक आरके कुंवर के आश्वासन पर शिक्षा मित्रों ने अनशन खत्म करने का एलान किया। हालांकि, शिक्षा मित्रों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका धरना जारी रहेगा। वहीं, स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण देर रात महासंघ के अध्यक्ष पूर्ण सिंह राणा को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शिक्षा मित्र क्रांतिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पूर्ण सिंह राणा पिछले 11 दिनों से शिक्षा निदेशालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठे थे। महासंघ डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर चुके करीब 900 शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति देने की मांग कर रहा है। पूर्ण सिंह राणा के अनुसार, उनसे पहले 1600 शिक्षा मित्रों को डीएलएड प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति दी जा चुकी है। जबकि, पिछले करीब एक साल से चक्कर काटने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है। बीते शनिवार से अनीता कप्सूड़ी और सुनीता राज ने भी पूर्ण सिंह राणा के समर्थन में आमरण अनशन शुरू कर दिया था। सोमवार को शिक्षा मित्रों की तीन बार निदेशक आरके कुंवर से वार्ता हुई। महासंघ का प्रतिनिधिमंडल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग पर अड़ा रहा।
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इस दौरान निदेशक ने स्पष्ट किया कि यह उनके स्तर का प्रकरण नहीं है। वह केवल शासन को पर प्रस्ताव बनाकर भेज सकते हैं। शासन स्तर से ही नियुक्ति प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है। उनके लिखित आश्वासन पर देर शाम शिक्षा मित्रों ने आमरण अनशन समाप्त करने की घोषणा की। निदेशक आरके कुंवर ने तीनों शिक्षा मित्रों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। शिक्षा मित्र क्रांतिकारी महासंघ की मीडिया प्रभारी चित्रा राणा ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने तक निदेशालय पर धरना जारी रहेगा। धरना देने वालों में दीपा कुनियाल, पूनम, विमल, धर्मेंद्र, केशव जोशी, कलावती, विद्याधर जोशी, हरीचंद, वीरेंद्र, नरेश, त्रिलोक सिंह, ललित मोहन, प्रदीप, जयप्रकाश, सतीश भट्ट, विजय लक्ष्मी, शशि, छटांगी देवी, पुष्पा समेत अन्य शिक्षा मित्र शामिल रहे।
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आसान नहीं नियुक्ति देना
आरटीई के शिक्षा मित्र से शिक्षक बनने के मानक, सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन और केंद्र सरकार की शर्तों के अनुसार शिक्षा मित्रों को नियुक्ति देना मुश्किल है। इसमें कई तरह की तकनीकी अड़चन है। अगर नियुक्ति देना संभव होता, तो सरकार पहले ही दे देती।
-कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
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