रूढ़िवादी व वैज्ञानिक सोच में अंतर करना आवश्यक
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के अवसर पर सोमवार को भारत ज्ञान विज्ञान समिति और दून साइंस फोरम की ओर से परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब में समकालीन संदर्भों में विज्ञान सम्मत दृष्टिकोण की भूमिका विषय पर सेमीनार का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ. नरेंद्र दाभोलकर को श्रद्धांजलि दी गई और विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान पर चर्चा की गई।
सेमिनार में भौतिकी के प्रोफेसर डॉ. बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि जिंदगी जन्म से शुरू नहीं होती और मृत्यु पर खत्म नहीं हो जाती। यही कारण है कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर आज भी प्रासंगिक हैं। डॉ. बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि समाज में विज्ञान से संबंधित काफी पूर्वाग्रह हैं। ऐसे में एक रूढ़िवादी व वैज्ञानिक सोच में अंतर करना बेहद आवश्यक है। बहुआयामी सोच इंसान को हकीकत की ओर अग्रसर करती है। वहीं ऐसा न करने पर हम रूढ़िवादी सोच की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान सम्मत सोच व्यक्ति को आजादी प्रदान करती है। समस्याओं का समाधान तकनीकी और आविष्कारों की मदद से ही किया जा सकता है। इस मौके पर दून साइंस फोरम के सचिव विजय भट्ट, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के महासचिव एसएस रावत, प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा, प्रोफेसर एसपी सती, डॉ. उमा भट्ट, डॉ. डीएस पुंडीर, रंगकर्मी सतीश धौलखंडी, कमलेश खंतवाल, ऐश्वर्या, नवानी, दिव्या, शिखा, तौफीक, नितेश, कुलदीप, जागृति, धर्मेश, गणेश, विनोद बगियाल, हृदयेश जोशी आदि मौजूद रहे।